नीड़ न दो चाहे टहनी का, आश्रय छिन्न-भिन्न कर डालो, लेकिन पंख दिए हैं तो, आकुल उड़ान में विघ्न न डालो..। हिंदी जगत के प्रख्यात कवि शिवमंगल सिंह सुमन की कविता की यह पंक्तियां दशकों बाद सार्थक होने जा रही है। नए साल में 1 जनवरी को पिंजरों में कैद एक हजार परिंदे आकाश छूने की व्याकुलता को पहली बार पूरा करेंगे। परिंदों को पंखों के बूते आकाश की उड़ान कराने और उन्हें आसमान से प्रकृति के अप्रतिम सौंदर्य को निखारने की जिम्मेदारी शहर के खेल संघों और सामाजिक संगठनों ने अपने कंधों पर ली है।
वन्य जीव अधिनियम 1972 के तहत पशु-पक्षियों का व्यवसाय नहीं किया जा सकता है। अगर कोई व्यवसाय करते हुए पकड़ा जाता है, तो इसमें तीन साल की सजा का प्रावधान है। पक्षियों को कैद करके रखना भी कानून के उल्लंघन के दायरे में आता है।
यह अद्भुत पहल है। यह सराहनीय है। संभवत देश में पहली बार ऐसा हो रहा जब अंग्रेजी नव वर्ष में 1000 पंछियों को उनका नया संसार मिलेगा। -मेयर नवीन जैन