शासन से गरीबों के लिए शुरू की गई उज्ज्वला योजना के गैस सिलिंडर अब रसोई घर की महज शोभा बढ़ाने लगे हैं। लगातार बढ़ती गैस की कीमतों से गरीबों का इस योजना से मोहभंग होने लगा है। लाभार्थी कई-कई माह तक गैस की रीफिलिंग नहीं कराते। इससे महिलाएं चूल्हा फूंकने को मजबूर हो रही हैं।
गरीब परिवारों को रसोई गैस की सुविधा देने के लिए वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना शुरू की गई थी। उस समय रसोई गैस की कीमत लगभग 423 रुपये थी। शासन से योजना के तहत मिलने वाले निशुल्क कनेक्शन को देखते हुए लोगों ने इस योजना को अपनाना शुरू कर दिया। इससे घरों में फूंके जाने वाले चूल्हे घटने लगे। वर्तमान में इस योजना के तहत जिले में 152390 कनेक्शन हैं लेकिन इन कनेक्शन धारकों के सामने गैस की बढ़ती कीमतों ने मुसीबत खड़ी कर दी है। योजना शुरू होने के समय के मुकाबले आज गैस की रीफिलिंग का खर्चा दोगुना हो चुका है। इस समय 820 रुपये में गैस सिलिंडर की रीफिलिंग की जा रही है। इस महंगाई के कारण इस योजना से जुड़े लोग अब गैस की रीफिलिंग कई-कई माह तक नहीं कराते।
सरकार रसोई गैस की कीमतें लगातार बढ़ाती जा रही है। कीमतें इतनी अधिक हो जाने के बाद गैस पर खाना बनाना काफी महंगा हो गया है। यही वजह है कि अब चूल्हे पर ही खाना बनाते हैं। महंगाई के कारण कई माह से सिलिंडर नहीं भरवाया है। - सीमा, निवासी गंजडुंडवारा।
सरकार पहले गैस की कीमतें बढ़ाती थी तो बढ़ी हुई कीमत सब्सिडी के रूप में मिल जाती थी। इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता था। सरकार ने अब सब्सिडी लगभग पूरी तरह से समाप्त ही कर दी है जिससे गैस काफी महंगी पड़ती है। -राजकुमारी
कोरोना के दौरान उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को गैस भरवाने के लिए धन दिया था, उस समय तीन माह तक लाभार्थियों के द्वारा अपनी गैस की रीफिलिंग कराई। इसके बाद से संख्या में गिरावट आने लगी है। - संजीव कुमार, जिला को-ऑर्डिनेटर, गैस कंपनी
कासगंज उज्ज्वला योजना से संबंधित फोटो राजकुमारी गृहणी- फोटो : KASGANJ
कासगंज उज्ज्वला योजना से संबंधित फोटो सीमा- फोटो : KASGANJ
कासगंज उज्ज्वला योजना लाभार्थी परिवार में चूल्हे पर खाना पकाती महिला सीमा- फोटो : KASGANJ