जिले के 356 ग्राम प्रधान 11 साल से 4.56 करोड़ रुपये का राशन डकारे बैठे हैं। विभाग को अब जाकर के इन प्रधानों से धन वसूली की सुध आई है। विभाग ने इन सभी प्रधानों की आरसी जारी कर दी है।
वर्ष 2009-10 में जिला में दोपहर के भोजन योजना में बड़े पैमाने पर गोलमाल हुआ। उस समय जिले की 389 ग्राम पंचायतों में से 385 प्रधानों ने बच्चों के हक के खाद्यान्न का वितरण न कराकर उसे स्वयं हड़प लिया। विभाग ने मामले की जांच कराई। जांच के बाद विभाग ने खाद्यान्न की कीमत का आंकलन कराया। इसकी कीमत उस समय 4.86 करोड़ रुपये आंकी गई। विभाग ने इसके बाद इन प्रधानों को नोटिस जारी किया लेकिन प्रधानों ने उस नोटिस को गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
वर्ष 2015 में पंचायत चुनाव के दौरान विभाग को इन प्रधानों की फिर से सुध आई और प्रधानों को फिर से नोटिस जारी किया गया, लेकिन धन की वसूली नहीं हो सकी। पंचायत चुनाव समाप्त हो जाने के बाद यह मामला फिर से ठंडे बस्ते में चला गया। पंचायत चुनाव को देखते हुए एक बार फिर से इन प्रधानों की फाइल फिर से बाहर निकल आई। विभाग ने इन प्रधानों को नोटिस दिया लेकिन नोटिस के बाद 356 प्रधानों ने धन जमा करने के लिए कोई गंभीरता नहीं दिखाई। अब विभाग ने इन प्रधानों पर बकाया 4.5694170 करोड़ रुपये वसूलने के लिए आरसी जारी कर दी।
29 प्रधानों ने जमा किया धन
बेसिक शिक्षा विभाग के द्वारा वर्ष 2009-10 में मध्याह्न भोजन के खाद्यान्न का गोलमाल करने वाले प्रधानों को नोटिस जारी करने के बाद 29 प्रधानों ने ही धन जमा करने में अपनी रुचि दिखाई। इन प्रधानों ने लगभग 26 लाख रुपये की धनराशि जमा कर दी।वर्ष 2009-10 में मध्याह्न भोजन के खाद्यान्न के धन की वसूली के लिए तत्कालीन प्रधानों की रिकवरी जारी कर दी गई है। -अंजली अग्रवाल बेसिक शिक्षा अधिकारी