निकाय चुनाव में भाजपा जहां भगवा फहराना चाहती है तो वहीं सपा लोकसभा उप चुनाव के परिणाम को दोहराने की तैयारी में है। लेकिन टिकट न मिलने से दोनों ही दलों के कई अपने बगावत की राह पर हैं। ऐसे में निकाय चुनाव में जीत का सपना पूरा करना आसान नहीं होगा।
रविवार को सपा और भाजपा दोनों ही प्रमुख दलों ने अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए। सपा ने जहां नगर पंचायत भोगांव और ज्योंती खुड़िया को रिक्त छोड़ दिया है तो वहीं भाजपा ने सभी दस निकायों के लिए प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। इससे दोनों ही दलों में कई प्रबल दावेदारों को झटका लगा है।
सपा में नगर पालिका परिषद से चुनाव की तैयारी कर रहे दो प्रमुख दावेदार साधना गुप्ता और सरिता राजपूत शीर्ष नेतृत्व का विश्वास नहीं जीत सकीं। सपा ने नगर पालिका परिषद मैनपुरी सुमन वर्मा को प्रत्याशी बनाया है। ऐसे में बगावत के स्वर उठना लाजिम है। सरिता राजपूत तो अभी चुप हैं, लेकिन साधना गुप्ता ने बगावत का बिगुल फूंक दिया है। उन्होंने साफ कर दिया है वे निर्दलीय ही चुनाव लड़ेंगी। उनका कहना है कि जहां सम्मान नहीं, वहां रहने से कोई फायदा नहीं है।
वहीं दूसरी तरफ भाजपा में कुसमरा से दावेदारी पेश कर रहे आलोक अग्निहोत्री भी अब बागी हो गए हैं। टिकट कटने पर उन्होंने भी निर्दलीय ही चुनाव लड़ने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी को नहीं छोड़ा है बल्कि पार्टी ने उन्हें छोड़ा है। ऐसे में उनकी कोई गलती नहीं है।
वहीं कई नेता ऐसे हैं, जो अब भी या तो मंथन में जुटे हैं या फिर शीर्ष नेतृत्व से वार्ता में जुटे हैं। ऐसे में सोमवार तक बागियों की संख्या और बढ़ सकती है।
आलोक अग्निहोत्री ने दाखिल किया नामांकन
भाजपा से बागी हुए आलोक अग्निहोत्री रविवार को तहसील किशनी स्थित नामांकन कक्ष में नामांकन करने के लिए पहुंचे। उनके साथ भाजपा नेता रमाशंकर तिवारी समेत अन्य भाजपाई भी नजर आए। ऐसे में कहीं न कहीं भाजपा को इसका खामियाजा उठाना पड़ सकता है।
निवर्तमान सपा नगर अध्यक्ष का इस्तीफा
सपा में टिकट को लेकर छिड़ी रार पदाधिकारियों के इस्तीफा देने तक पहुंच गई है। सपा से नगर पालिका परिषद अध्यक्ष के लिए दावेदारी पेश कर रहीं साधना गुप्ता को टिकट नहीं मिला है। इससे नाराज सपा के निवर्तमान नगर अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने रविवार को अपना इस्तीफा जिलाध्यक्ष को सौंप दिया है। इसमें लिखा है कि जन भावना के अनुसार साधना गुप्ता को टिकट मिलना चाहिए थे, जिसके बारे में अवगत भी करा दिया गया था। ऐसे में टिकट कटने पर वैश्य समाज व अन्य जनमानस में असंतोष है।