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फॉगिंग ठप, मच्छरों का प्रकोप

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आगरा। मानसून की बारिश के बाद शहर की सड़कों पर जलभराव हुआ तो इनमें मच्छर पनप गए। अब शाम होते ही घर से बाहर निकलने पर लोगों पर मच्छरों का हमला हो रहा है जो उन्हें बीमार कर रहा है। बारिश के बाद हर बार हो रहे जलभराव में न एंटी लार्वा का छिड़काव हो रहा है और न ही फॉगिंग की जा रही है। नगर निगम का फॉगिंग का रोस्टर पार्षदों तक को पता नहीं। मच्छरों के आतंक के बीच ऐसे विकट हालात में फॉगिंग ठप हो जाने पर पार्षद नगर निगम अधिकारियों से सवाल कर रहे हैं।
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नगर निगम के पास फॉगिंग का बड़ा अमला है, लेकिन मच्छरों के आतंक के बीच फॉगिंग और एंटी लार्वा का काम पूरी तरह से ठप है। नगर निगम के ही पार्षदों का कहना है कि हर साल नगर निगम फॉगिंग और एंटी लार्वा छिड़काव की दवाओं, डीजल और मशीनों की मरम्मत आदि पर 4.50 करोड़ रुपये खर्च करता है। 14 बड़ी मशीनों और मोटर साइकिल पर लगने वाली 25 छोटी मशीनें बेडे़ में हैं, लेकिन इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है।
एक महीने से पानी भरा
पानी भरे एक महीना हो गया लेकिन फॉगिंग नहीं हुई। बारिश के बाद सड़कों के किनारे, गलियों, मोहल्लों और खाली प्लॉटों में पानी भरा है, जिसमें मच्छर पनप रहे हैं, पर न एंटी लार्वा का छिड़काव किया, न फॉगिंग की जा रही - जरीना बेगम, पार्षद, ख्वासपुरा
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नहीं हो रही फॉगिंग
फॉगिंग के नाम पर नगर निगम के अधिकारी 3 से 4 करोड़ रुपये ठिकाने लगा रहे हैं। मेरे वार्ड में एंटी लार्वा का छिड़काव तक नहीं किया। मच्छरों का आतंक है। पूरा वार्ड नाले के किनारे बसा है, इसलिए फॉगिंग जरूरी है, पर हो नहीं रही - बंटी माहौर, पार्षद, राजनगर
कागजों में कर रहे फॉगिंग
हर बारिश में जलभराव के बाद मच्छरों का ऐसा प्रकोप रहता है कि शाम को बाहर दो मिनट भी खड़ा होना मुश्किल है। एंटी लार्वा और फॉगिंग का पहले रोस्टर बनता था, पर अब कागजों में ही फॉगिंग कर ले रहे हैं। - ज्ञानवती, पार्षद, काजीपाड़ा
शिकायतों पर कार्रवाई नहीं
फॉगिंग और एंटी लार्वा के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई जिस तरह से बंदरबांट हो रही है, उसकी जांच होनी चाहिए। इस बार सदन में इसका प्रस्ताव लगाएंगे, लोग मच्छरों से परेशान हैं, पर फॉगिंग नहीं हो रही, कोई शिकायतों पर कार्रवाई नहीं कर रहा। - प्रियंका प्रजापति, पार्षद, खातीपाड़ा
मच्छर भगाने की दवाओं की बिक्री बढ़ी
नगर निगम द्वारा फॉगिंग बंद होने के कारण लोगों ने खुद ही मच्छरों से निपटने का प्रयास किया है। शाम होते ही घरों में घुस रहे मच्छरों से बचने के लिए कॉइल, रेपलेंट, लिक्विड आदि की खरीद कर रहे हैं। घर से बाहर निकलते ही मच्छरों का एकाएक हमला हो रहा है। चंद मिनट भी एक जगह खड़ा होना मुश्किल है। बोदला के व्यापारी श्रीकांत वर्मा ने बताया कि तीन माह पहले तक हर दिन 10 से 12 कॉइल और लिक्विड बिकते थे, पर अब इनकी संख्या 40 के पार है। हर दूसरा ग्राहक मच्छर भगाने वाले किसी न किसी उत्पाद को मांग रहा है।
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