नया परिसीमन और टिकट का बंटवारा। नगर निकाय चुनाव में कम मतदान। दिग्गजों के लिए चिंता का सबब बन गया। नगर निगम के 40 वार्डों में समीकरण बिगड़ते नजर आ रहे हैं। भाजपा प्रत्याशियों के लिए पा से बागी हुए कार्यकर्ता और पदाधिकारी ही चुनौती बन सकते हैं। वहीं, कुछ वार्डों में निर्दलीयों की रफ्तार से भी भाजपा प्रत्याशियों को सीधी चुनौती मिली है।
टिकट बंटवारे को लेकर पनपे असंतोष से भाजपाइयों की आस्था डगमगा गई। जिन निवर्तमान पार्षदों का टिकट कटा, उन्होंने निर्दलीय ताल ठोकी। जिन्हें टिकट नहीं मिला, वो भी मैदान में कूद पड़े। इनमें पूर्व पार्षद, पार्टी पदाधिकारियों से लेकर कार्यकर्ता तक शामिल हैं। किसी ने अपनी पत्नी, तो किसी ने मां के लिए टिकट मांगा। ऐसे में भाजपा में गुटबाजी भी सतह पर उभर आई। पार्टी से कई पदाधिकारियों को निलंबित किया गया। इससे भी असंतोष नहीं थमा, जिसका असर मतदान के दिन देखने को मिला। 100 वार्डों में 40 वार्ड ऐसे हैं, जहां भाजपा के लिए अपने ही चुनौती बन गए हैं। प्रत्याशियों का गणित बिगड़ता हुआ नजर आया।
दूसरी वजह परिसीमन माना जा रहा है। परिसीमन में 10 नए वार्ड बढ़े। दर्जनों मुहल्ले, कॉलोनियां सूची से गायब हो गईं। बीएलओ ने भी मतदाताओं को नहीं बताया। ऐसे में नगर निगम में मतदान प्रतिशत पिछले चुनाव से भी कम रहा है। 2017 में भाजपा के 90 में 52 पार्षद जीते थे।
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