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शिक्षासत्र के एक माह बीतने के बाद भी बाजार में नहीं आई एनसीआरटी की किताबें

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कासगंज। नए शिक्षासत्र को शुरू हुए एक माह का समय बीत चुका है, लेकिन बाजार में माध्यमिक कक्षाओं की एनसीईआरटी की किताबें अभी तक नहीं आ सकी हैं। जबकि निजी पब्लिकेशन की किताबें बाजार में पांच गुना तक महंगी है। ऐसे में सरकारी किताबों के अभाव में छात्र-छात्राएं महंगी किताब खरीदकर अपनी पढ़ाई करने को मजबूर हो रहे हैं।
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शासन से कक्षा 9 से 12 तक की पढ़ाई में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू कर रखा है। छात्र-छात्राओं को सस्ती किताबें उपलब्ध कराने के लिए सरकार द्वारा कुछ पब्लिकेशन को किताबों के प्रकाशन की अनुमति दी जाती है, लेकिन इसमें भी खेल होता है। कुछ निजी पब्लिकेशन एनसीईआरटी पाठ्यक्रम की अपनी किताबों को छापकर बाजार में उतार देते हैं। इनमें पाठ्यक्रम तो एनसीईआरटी का ही होता है, लेकिन इन किताबों की कीमतों में एनसीईआरटी की सरकारी किताबों से काफी अंतर रहता है। कक्षा 9 व 10 की सरकारी किताबों का कोर्स लगभग 300 रुपये का है। जबकि निजी पब्लिकेशन की किताबों को यही कोर्स 600 रुपये तक बैठता है। वहीं कक्षा 11 एवं 12 का एनसीईआरटी का विज्ञान वर्ग का कोर्स 500 रुपये का बैठता है। वहीं इन कक्षाओं का निजी पब्लिकेशन का कोर्स 2400 रुपये तक बैठता है। निजी पब्लिकेशन की किताबें तो बाजार में पूरे साल ही उपलब्ध रहती हैं। जबकि सरकारी पब्लिकेशन की किताबें काफी बिलंब से ही बाजार में आ पाती हैं। शिक्षासत्र के एक माह बीतने के बाद भी सरकारी पब्लिकेशन की किताबों के बाजार में न आ पाने से सबसे अधिक परेशानी गरीब तबके के परिवारों के सामने रहती है। उनके लिए निजी पब्लिकेशन की किताबों को खरीदना आसान नहीं होता ऐसे में उनकी शिक्षा पर असर पड़ता है।
सरकारी पब्लिकेशन की किताबों को शासन से अब अलॉट किया गया है। अभी एक दो विषय की किताबें बाजार में आई हैं। जल्द ही सभी किताबों के बाजार में आने की उम्मीद है। - संजीव कुुमार, कारोबारी
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निजी पब्लिकेशन की किताबें बाजार में हर समय मिल जाती हैं, लेकिन सरकारी पब्लिकेश्न की किताबें शासन के निर्देश के बाद बाजार में उपलब्ध कराई जाती है, जिससे आने में विलंब होता है। - विजय कुमार कारोबारी
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