ताजनगरी में जानलेवा हो चुके बंदरों के आतंक से बचना है तो खुले में कूड़ा और कचरे में खाना फेंकना बंद करना पड़ेगा। वन्यजीव विशेषज्ञों ने लोगों को फिर चेताया है कि जब तक खुले में कूड़ा पड़ा रहेगा, बंदर खाने की तलाश में टोलियों में आते रहेंगे और खाना न मिलने पर चिड़चिड़े होकर हमला करते रहेंगे। बंदरों के प्रति धार्मिक नजरिया बदलिए, तभी बंदरों का आतंक रुक पाएगा।
बंदरों के हमले की लगातार बढ़ रही घटनाओं को लेकर अमर उजाला ने वन्य जीव विशेषज्ञों और वन अधिकारियों से बात की, जिसमें बंदरों की समस्या से निपटने के कई विकल्प सामने आए, लेकिन उससे पहले लोगों की मानसिकता बदलना सबसे जरूरी बिंदु रहा। वाइल्ड लाइफ एसओएस के आगरा प्रभारी बैजूराज के मुताबिक बंदरों को खाना देने के लिए जगह तय करें और केवल वहीं पर खाना दिया जाए। जगह जगह खाना फेंकना बंद करना होगा।
25 एकड़ जमीन, 55 करोड़ मिलें, तब संभलेंगे बंदर
बंदरों के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए वाइल्ड लाइफ एसओएस ने वन विभाग को आगरा और मथुरा में रेस्क्यू सेंटर (बंदरशाला) खोलने का प्रस्ताव दिया है, जिसमें सेंट्रल जू अथारिटी के मानकों के मुताबिक 2 हजार बंदरों को रखने के लिए कम से कम 25 एकड़ जमीन चाहिए। एसओएस ने पांच साल तक रेस्क्यू सेंटर में दो हजार बंदरों के खाने-पीने स्वास्थ्य और अन्य रखरखाव के लिए 55 करोड़ रुपये की मांग की है।