वृंदावन (मथुरा)। श्री हरिदास सेवा संस्थान रसोपासना पीठ में चल रहे नव दिवसीय रस अनुष्ठान में बृहस्पतिवार को ब्रज के रसिक संत श्री बाबा दयाल दास ने सरस पदावली गायन किया। संस्थान के मंत्री विष्णुदान शर्मा ने कहा कि स्वामी श्री हरिदास जी महाराज ने अपनी भक्ति से, अपने अनन्य प्रेम से श्रीबांकेबिहारी जी महाराज को इतना रिझाया कि उन्हें स्वयं श्री स्वामी हरिदास जी की साधना स्थली निधिवन राज में प्रगट होना पड़ा।
बाबा दयाल दास ने सर्वप्रथम नामावली गुरुदेव जू, श्री ललित किशोरी देव जू का पद श्री हरिदास सरन जे आरो..., रस में रस पिए कुंज बिहारी, हमारे धन वृंदावन प्यारी, भजन करे सोई जीते पदों को गाकर वातावरण को गुंजायमान कर दिया। कार्यक्रम में बाबा रतन दास, किशोरी दास भक्तमाली, कुंज बिहारी दास भक्तमाली, प्रमोद शास्त्री, मोहिनी शरण, अशोक अरोड़ा, बब्बू गोस्वामी, हरिओम, धर्मवीर, चमन नागर थे।
इधर, श्री हरिदासीय राधा प्रसाद सेवा ट्रस्ट द्वारा आयोजित स्वामी हरिदास आर्विभाव महोत्सव में शास्त्रीय संगीत गायन वादन की आध्यात्मिक रस धारा से भक्त सराबोर रहे। शुभारंभ ठाकुर श्री राधा लालित बिहारीजी की चरण वंदना एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। तानसेन की तेरहवीं पीढ़ी से प्रख्यात संगीतज्ञ पंडित कामोद मिस्र शास्त्री ने ध्रुपद गायन की प्रस्तुति दी।
श्री स्वामी हरिदास पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर राधा प्रसाद देव महाराज ने विचार व्यक्त किए। महंत मोहिनी शरण महाराज ने कामोद मिश्रा को ध्रुपद राग रसिक सम्मान प्रदान कर अभिनंदन किया। कार्यक्रम में आचार्य बद्रीश, सौरभ गौड़, मनोज, मयंक, सुमित अग्रवाल, राजू अग्रवाल, राकेश दास, माधव मिश्रा, प्रशांत व्यास, आनंददास, मंगल दास, गौरांग दास व अशोक पवार उपस्थित रहे।