वृंदावन (मथुरा)। श्रीराधाकृष्ण की लीला भूमि वृंदावन के वर्तमान स्वरूप में करीब 350 से 400 साल पुराने मंदिर, आश्रम और कुंज निकुंज स्थित हैं, जिनका अस्तित्व अब संकट में है। कई प्राचीन धरोहर तो दम तोड़ रही हैं। इसमें वृंदावन के प्रमुख मंदिर भी शामिल हैं। इतना ही नहीं, यहां के कुंज-निकुंज की शोभा बने वृक्षों को भी मिटा दिया गया है। इससे यहां का वन क्षेत्र बढ़ने के बजाए घट रहा है।
भले ही प्राचीन धरोहर की दृष्टि से वृंदावन बहुत धनी शहर है। यहां के चार मंदिरों का संरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन है। इसके अलावा अनेक प्राचीन भवनों में शामिल मंदिर और धर्मशालाएं निजी संपत्ति बने हैं। लेकिन ये सब बगैर उचित रखरखाव के दम तोड़ रहे हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की देखरेख वाले गोविंद देव मंदिर और मदन मोहन मंदिर से पत्थर आए दिन टूटकर गिरते रहते हैं।
इन मंदिरों के भवनों में दरारें आ गई हैं। निजी संपत्ति में शामिल प्राचीन धरोहरों को मिटाया जा रहा है। यहां तक कि वृंदावन के मूल स्वरूप का हिस्सा अनेक क्षेत्रों से वृक्षों को नष्ट कर दिया गया है। यहां ऊंचे भवन बना दिए गए हैं। यमुना के प्राचीन खूबसूरत घाट अब जमीन का हिस्सा बन गए हैं।
संरक्षित मंदिरों के आसपास 585 अवैध निर्माण
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा जनसूचना के तहत दी गई जानकारी के मुताबिक वृंदावन के चार प्राचीन धरोहरों के आसपास 585 अवैध निर्माण हैं। इन प्राचीन धरोहरों में श्रीगोविंद देव मंदिर, श्रीमदनमोहन मंदिर, श्रीजुगलकिशोर मंदिर एवं पुराना श्रीराधावल्लभ मंदिर शामिल हैं। यह जानकारी बाग-बुंदेला निवासी एडवोकेट प्रहलादकृष्ण शुक्ला को जनसूचना के तहत एएसआई ने उपलब्ध कराई।