थाना सदर की आगरा कैंट पुलिस चौकी में बुधवार सुबह पूछताछ के लिए लाए गए व्यापारी की हालत बिगड़ गई। पुलिस उन्हें अस्पताल लेकर पहुंची, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद भड़के उनके परिवारीजनों ने पुलिस पर कार्रवाई के लिए नामनेर पर जाम लगा दिया। व्यापारी की बेटी ने चार रिश्तेदारों के खिलाफ हत्या की धारा में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
नामनेर निवासी राकेश बघेल पुत्र कालीचरन बघेल दोपहिया वाहनों की खरीद-बिक्री का काम करते थे। हाल में काम बंद कर दिया था। दुकान किसी और को किराये पर दे दी थी। राकेश की बड़ी बेटी डौली ने बताया कि सुबह साढ़े 10 बजे चीता मोबाइल के दो सिपाही घर आए। उन्होंने संपत्ति के विवाद में शिकायत मिलने की बात कही।
इसके बाद पिता को बाइक पर बैठा लिया। मकान के कागजात चौकी पर लेकर आने की कहकर पिता को अपने साथ ले गए। डौली ने बताया कि जब वो कैंट चौकी पहुंची तो पिता सोफे पर पड़े हुए थे। पुलिसकर्मी उनके चेहरे पर पानी डाल रहे थे। उसने शोर मचा दिया।
चिकित्सकों ने मृत घोषित किया
इस पर सिपाही उन्हें ई-रिक्शा से एक चिकित्सक के पास लेकर आए, लेकिन चिकित्सक ने रेफर कर दिया। बाद में देहली गेट स्थित अस्पताल लाए, जहां चिकित्सकों ने उनको मृत घोषित कर दिया। तब सिपाही राकेश को एसएन मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी लेकर पहुंचे।
घटना की जानकारी पर एसपी यातायात प्रशांत कुमार, सीओ सदर विकास जायसवाल सहित थाना सदर की फोर्स पहुंच गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि मामले में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
डौली की तहरीर पर थाना सदर में मृतक के बड़े भाई भीमसेन, ओमी, भतीजे लोकेंद्र और विंटा चाय वाला के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। आरोप लगाया है कि चारों आरोपी पिता को ले गए थे। उनके साथ मारपीट की। हालत बिगड़ने पर पिता को चौकी पर छोड़कर चले गए। बाद में उनकी मौत हो गई।
35 गज के मकान का था विवाद
राकेश बघेल चार भाइयों में तीसरे नंबर के थे। पहले नंबर के भीमसेन, दूसरे नंबर के ओमी, तीसरे नंबर के राकेश और चौथे नंबर के दिनेश थे। राकेश की बेटी डौली ने बताया कि ताऊ भीमसेन कई साल पहले टूंडला में अपने ससुराल पक्ष के साथ रहने लगे थे। चाचा दिनेश की कई साल पहले मौत हो गई थी।
इस पर दादा कालीचरन ने तकरीबन 70 गज के मकान पिता राकेश और ताऊ ओमी के बीच बराबर का बांट दिया था। उनके हिस्से में एक दुकान भी है। एक साल पहले भीमसेन भी संपत्ति पर अपना हिस्सा बताने लगे, जबकि वसीयत में उनका नाम नहीं था।
एक जनवरी को भी पुलिस से शिकायत की थी। जब भी पुलिस पकड़कर ले गई थी। तब किसी तरह छुड़ा लाए थे। इस बार भी दो पुलिसकर्मी आए। पिता को बाइक पर चौकी ले आए, जबकि कोई मुकदमा दर्ज नहीं था।