राष्ट्रीय जालमा कुष्ठ एवं अन्य माइक्रो बैक्टीरियल संस्थान का वार्षिकोत्सव
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उत्तर प्रदेश के आगरा में कुष्ठ की बीमारी से निजात दिलाने के लिए वैक्सीन बनाने पर शोध चल रहा है। चूहों पर ट्रायल सफल हो गया है। अभी अन्य परीक्षण बाकी हैं। भविष्य में मरीजों को वैक्सीन लगाई जाएगी। इससे मर्ज तेजी से ठीक होगा और नए मरीजों की भी रोकथाम होगी। राष्ट्रीय जालमा कुष्ठ एवं अन्य माइकोबैक्टीरियल संस्थान (आईसीएमआर) के 48वें वार्षिकोत्सव में निदेशक ने ये जानकारी दी है।
निदेशक डॉ. एएम खान ने बताया कि टीके से घाव तेजी से भरेंगे। इसके ठीक होने में लगने वाला समय भी कम होगा। अभी कुष्ठ रोगियों का उपचार 12-18 महीने तक चलता है। संस्थान के चिकित्सा विज्ञानियों ने चूहों के फूट पैड मॉडल को कुष्ठ रोग के जीवाणु के अध्ययन के लिए विकसित किया है। इससे दवाओं का मूल्यांकन भी बेहतर हो सकेगा। कुष्ठ रोग के संक्रमित अंगुलियों की सर्जरी के लिए क्ला हैंड शल्य चिकित्सा भी विकसित की है।
मुख्य अतिथि केजीएमयू के कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने बताया कि बैक्टीरियल, वायरस जनित बीमारियों का खतरा कम नहीं हुआ है। टीबी के खात्मे के लिए उन्होंने बताया कि चिकित्सकीय दवा निगरानी सेल के जरिये जांच करने पर ये पता चलता है कि रक्त में दवा कितनी आ रही है। इसकी निगरानी से टीबी का इलाज और बेहतर होगा। विदेशों में ये हो रहा है, देश में भी इस पर कार्य किया जा रहा है।
वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. विवेक गुप्ता ने बताया कि सीबी नैट और ट्रूनैट से जांच जल्दी होने के साथ हैंड हेल्ड एक्सरे मशीन से मौके पर ही एक्सरे कर मरीज चिह्नित किए जा रहे हैं। अतिथियों ने संस्थान की पत्रिकाओं का भी विमोचन किया। आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल वर्चुअल शामिल हुए। विशिष्ट अतिथि प्रो. सुंदरलाल, डॉ. डीएस चौहान, डॉ. केके मोहंती आदि मौजूद रहे।