आगरा। लेडी लॉयल में सोमवार को इलाज के लिए आए मरीजों को धक्कामुक्की झेलनी पड़ी। पर्चे के लिए मारामारी होने पर गार्ड ने मरीजों को धकियाते हुए गेट बंद कर लिया। इस दौरान दो-तीन महिलाएं गिर भी पड़ीं और रोने लगीं। आशाओं के हंगामा करने पर गार्ड ने गेट खोला। तब फिर से पर्चे बनाए गए।
सोमवार को वक्त पूर्वाह्न 11:40 बजे का था। लेडी लॉयल के पर्चा काउंटर की गैलरी मरीजों से भरी हुई थी। करीब 90 से अधिक मरीज गेट पर खड़े थे। इस पर गार्ड ने गेट से हटाने के लिए मरीजों से धक्कामुक्की और तीमारदारों से अभद्रता की। इस पर मरीज गार्ड से बहस करने लगे तो उसने सभी को पीछे धकियाते हुए गेट बंद कर लिया। इसमें दो-तीन महिलाएं गिर पड़ीं, जिसके बाद वे रोने लगीं। यह हाल देख आशाओं ने हंगामा किया। इसके बाद गार्ड ने गेट खोला और पर्चे बनवाना शुरू किया।
आशा ने संभाला बच्चे को, पर्चा बनवाया
शाहगंज से आईं रेखा देवी ने बताया कि प्रसव कराने के बाद शरीर में सूजन है, इसके लिए लेडी लॉयल में दिखाने आई। बच्चा लेकर दो घंटे से लाइन में खड़ी रही, गेट पर धक्कामुक्की से वह गिर गईं। परेशान होने पर रोने लगी। उनके बच्चे को आशा ने संभाला और उनका पर्चा बनवाया।
ढाई घंटे में भी पर्चा नहीं बना, आए चक्कर
नगला पदी की शकुंतला देवी ने बताया कि गर्भवती पुत्रवधू को दिखाने आईं थीं। सुबह साढ़े नौ बजे से लाइन में लगने पर 11:30 बजे तक पर्चा नहीं बना। धक्कामुक्की से उसे चक्कर आने लगे। ऐसे में उसे बिठाकर खुद में लाइन में लगना पड़ा। सामान्य होने पर फिर वह लाइन में लगी, पर्चा बना।
तबीयत बिगड़ने पर भी सुनवाई नहीं
गोपालपुरा की प्रियंका गौड़ प्रसव के बाद आशा के साथ दिखाने आईं थी। उन्होंने बताया कि यहां डेढ़ घंटे लाइन में लगने पर भी पर्चा नहीं बना। परेशानी होने पर गार्ड से भी कहा, लेकिन उसने पीछे जाकर लाइन में लगने को कहा। आशा ने हालत बिगड़ने की बात कही, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
सोमवार को आते हैं डेढ़ गुना मरीज
रविवार को ओपीडी बंद होने के कारण सोमवार को आम दिनों के मुकाबले करीब डेढ़ गुना मरीज आते हैं। इससे पर्चा काउंटर पर भीड़ हो जाती है। पर्चा काउंटर बढ़वाने के लिए कमरों की कमी है। एक कमरे में जन औषधि केंद्र और एक में टीकाकरण हो रहा है, ऐसे में एक ही कमरा है, जिसमें तीन कंप्यूटर हैं। इससे भीड़ होने पर अव्यवस्था हो जाती है। गार्ड को धक्कामुक्की कर गेट नहीं बंद करना चाहिए था, उसे हिदायत देते हुए काउंटर के लिए एक और कमरे की व्यवस्था कराती हूं। - डॉ. रेखा गुप्ता, प्रमुख अधीक्षक