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सुप्रीम कोर्ट को भेजा पत्र, माननीयों की पेंशन पर लगे रोक, कोर्ट ने लिया संज्ञान

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आगरा। जनप्रतिनिधियों की पेंशन व अन्य सुविधाओं पर रोक लगाने के संबंध में सत्यमेव जयते ट्रस्ट द्वारा मुख्य न्यायाधीश को भेजे शिकायती पत्र का सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया है। शिकायत को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार कर लिया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि जनप्रतिनिधि कोई सरकारी कर्मचारी नहीं हैं। आठ घंटे की ड्यूटी भी नहीं करते। न किसी सेवा के लिए बाध्य हैं। न कोई शैक्षिक योग्यता निर्धारित है। फिर उन्हें सरकारी कर्मचारियों की तरह पेंशन व अन्य सुविधाएं क्यों दी जाएं।
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सांसद, विधायक व अन्य जनप्रतिनिधियों की पेंशन व अन्य सुविधाएं प्रतिबंधित करने की मांग करते हुए ट्रस्ट के महामंत्री गौतम सेठ व लीगल सेल के बृज खंडेलवाल ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को 16 सितंबर को पत्र लिखा था। पत्र में लिखा था कि समाज के विभिन्न संगठन व प्रतिनिधि जो सेवा कार्य से जुड़े हैं उन्हें उस काम के बदले कोई सुविधा या पेंशन नहीं मिलती। फिर जनप्रतिनिधियों को पेंशन व अन्य सुविधाएं देना क्या उचित है। मामले में सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अभी कोई तारीख नहीं दी है। ट्रस्ट के मीडिया प्रभारी नंद किशोर गोयल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में संबंधित पक्षों को जल्द नोटिस जारी कर सकता है।
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