आरोप पत्र में दाखिल होने के बाद न्यायालय ने 25 सितंबर से सुनवाई शुरू की। सुनवाई के दौरान गवाहों ने गवाही दी और साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस हुई। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता अनिल यादव एवं पीड़िता के पक्ष के निजी अधिवक्ता उपेंद्र मिश्रा ने आरोपी को अधिकतम सजा की पैरवी की।
प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश नवनीत कुमार ने इस मामले में आरोपी आमिद को दोषी पाया। न्यायालय ने शनिवार को बच्ची से दरिंदगी करने वाले आमिद को मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई और ढाई लाख रुपये का जुर्माना आरोपित किया। जुर्माने की यह राशि मासूम के संरक्षकों को उसके चिकित्सीय व्यय, शिक्षा और उसके जीवन यापन के लिए दी जाएगी।
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