आगरा खंदारी से आईएसबीटी तक नहर की सवा चार हेक्टेयर जमीन पर कब्जा कर पेट्रोल पंप, ढाबे और शोरूम बना लिए गए। जोंस मिल प्रकरण में नहर की पैमाइश में बुधवार को इन अवैध कब्जों का पता चला। पैमाइश पूरी होने पर कब्जेदारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
जोंस मिल के मामले में यह बात सामने आई कि लोगों ने नहर, सिंचाई, डूब क्षेत्र, नजूल की भूमि पर कब्जा कर लिया है। नहर की जमीन की जांच शुरु हुई तो रोज नए खुलासे हो रहे हैं। बुधवार को खंदारी चौराहा से आईएसबीटी तक पैमाइश कराई गई। नगर निगम, तहसील और नहर विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की संयुक्त टीम ने पाया कि मौके पर नहर नहीं है।
कई जगह नहर की कुछ जमीन पर कब्जा कर लिए जाने से यह नाले के रूप में मिली थी लेकिन यहां नाला क्या नाली भी नहीं है। इस पर अवैध कब्जा करने वालों की सूची तैयार की गई। टीम के सदस्यों ने बताया कि इन सभी के खिलाफ सरकारी जमीन पर कब्जा करने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। पैमाइश पूरी होने पर जोंस मिल मामले की जांच समिति को रिपोर्ट दी जाएगी।
सिर्फ नोटिस जारी किए, कब्जे नहीं हटाए
पैमाइश में यह भी साफ हो गया कि नहर की जमीन किसी अन्य विभाग को नहीं सौंपी गई है। न ही कोई पट्टा आवंटित किया गया है। यह जमीन अभी भी सिंचाई विभाग के नाम है। इसके बावजूद सिंचाई विभाग ने इससे अतिक्रमण हटाने के प्रयास नहीं किए। पांच साल पहले नोटिस जरुर जारी हुए लेकिन कार्रवाई नहीं की गई।
100 साल पहले नहर थी, आज नाली तक नहीं
एनएच-2 पर जहां भगवान टॉकीज फ्लाईओवर है, वहां से नहर गुजरती थी। न्यू आगरा थाना जिस जमीन पर बना है, वह नहर की है। यहां आसपास होटल भी नहर की जमीन पर है जबकि नहर सिर्फ सिंचाई विभाग के कागजों में बची है।
सिंचाई विभाग के रिकॉर्ड में यह नहर दिल्ली से आती है। आगरा में जोंस मिल तक जाती है। एनएच-2 से होकर गुजरती है। सुल्तानगंज की पुलिया, जीवनी मंडी में नहर की जगह 20 फुट का नाला रह गया है। नहर कहीं नहीं है।