जोंस मिल प्रकरण का आरोपी बिल्डर चुनमुन
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पुलिस की लापरवाही
बम धमाके के केस में बिल्डर चुनमुन का नाम बढ़ाया गया। इसमें साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया गया। बाद में विधिक राय के आधार पर निकाला गया। विवेचक की लापरवाही सामने आई। उसके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हुई। इसके बाद जांच के आदेश हुए। मगर, जांच पूरी नहीं हो सकी। आज तक जांच का पता नहीं चला।
जमीन खुर्दबुर्द केस में पुलिस की लापरवाही ने आरोपियों को बचने का मौका दिया। बिल्डर हेमेंद्र अग्रवाल उर्फ चुनमुन को हरिद्वार से पकड़ा। उसे जेल भेजा गया। बाद में रज्जो जैन और सरदार कंवलदीप सिंह की गिरफ्तारी के लिए दबिश का दावा किया। मगर, केस डायरी में कमी की गई। पुलिस ने कई दिन बाद भी घटनास्थल का निरीक्षण नहीं किया। इसका फायदा आरोपियों को कोर्ट में मिला। कोर्ट ने रज्जो जैन और सरदार कंवलदीप सिंह को अग्रिम जमानत दी। बाद में बिल्डर को भी जमानत मिल गई।
जमीन खुर्दबुर्द केस में तीन महीने बाद भी चार्जशीट नहीं लगाई है। इससे आरोपी पक्ष की ओर से प्रार्थनापत्र दिया गया। विवेचना स्थानांतरित करने की मांग की। पुलिस प्रशासनिक अधिकारी कुछ करते, उससे पहले ही विवेचना ईओडब्ल्यू चली गई।
पुलिस ने जमीन खुर्दबुर्द केस में मामूली धारा लगाईं। बाद में छीछालेदर होने पर केस में धारा की वृद्धि की गई। इसके बावजूद केस डायरी कमजोर रखी गई, जबकि इस केस की समीक्षा अधिकारी तक कर रहे थे।
जांच के स्थानांतरण पर उठे सवाल
20 लाख से अधिक के मामलों में जांच ईओडब्ल्यू में स्थानांतरित की जा सकती है। मगर, आगरा के कई बड़े मामलों में ऐसा नहीं हुआ। इसमें नाथ का बाग का मामला शामिल है। नाथ का बाग में भी फर्जी तरीके से जमीनों को बेचा गया। जोंस मिल मामले में आरोपी पक्ष की ओर से प्रार्थनापत्र पर विवेचना स्थानांतरित होने से कई सवाल खड़े हो गए हैं।
जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी बसंत गुप्ता ने बताया कि आमतौर पर जो नियम है और जो व्यवहारिक पहलू है, उसके अनुसार अभियुक्त के प्रार्थनापत्र पर विवेचना स्थानांतरित नहीं की जाती है। पीड़ित पक्ष के अनुरोध पर निष्पक्ष विवेचना के लिए किसी भी एजेंसी से जांच कराई जा सकती है। पूर्व में हाईकोर्ट के एक जजमेंट के बाद शासन ने भी इस संबंध निर्देश दिए थे कि अभियुक्त के प्रार्थनापत्र पर विवेचना स्थानांतरित नहीं होनी चाहिए।
सोमवार को आएगी ईओडब्ल्यू की टीम
ईओडब्ल्यू की टीम ने केस डायरी कब्जे में ले ली है। उसका अध्ययन किया जा रहा है। इसमें क्या लिखा गया है। इसके बाद विवेचना की जाएगी। इसमें देखा जा रहा है कि वर्षों से जमीनों की खरीद-फरोख्त की गई तो संबंधित विभाग क्या कर रहे थे, रजिस्ट्री कैसे हो गईं, किन-किन लोगों ने जमीन बेची और किन लोगों ने जमीन खरीदीं, पुलिस ने अब तक विवेचना में क्या पाया, जिन लोगों के बयान लेने होंगे, उनको नोटिस देकर बुलाया जाएगा। सोमवार को फिर से टीम आगरा आएगी। केस से संबंधित दस्तावेज भी कब्जे में लेगी।
विवेचना की जाएगी
ईओडब्ल्यू कानपुर के एसएपी बाबूराम ने बताया कि जोंस मिल की जमीन से संबंधित मुकदमे की केस डायरी को कब्जे में ले लिया गया है। इसे देखा जा रहा है। विवेचना की जाएगी। सभी तथ्यों को केस में शामिल किया जाएगा। संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे।