न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sun, 25 Jul 2021 09:52 AM IST
भारत में इनफर्टिलिटी एक आम समस्या है। यहां हर चार में से एक दंपती बच्चा पैदा करने में परेशानी का सामना करते हैं। इस बारे में खुलकर चर्चा करने से हिचकते हैं जिससे इस बीमारी के इलाज में बाधा आती है। विश्व आईवीएफ दिवस के मौके पर यह कहना है उत्तर प्रदेश का पहला आईवीएफ बेबी देने वाले और आगरा में रेनबो आईवीएफ के निदेशक डॉ. जयदीप मल्होत्रा और डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा का।
उन्होंने जानकारी दी कि दुनिया की पहली टेस्ट ट्यूब बेबी लुईस ब्राउन का जन्म 1978 में 25 जुलाई को हुआ था और भारत की 6 अगस्त 1986 को। इसके 11 साल बाद आगरा के मल्होत्रा टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर में। यहां डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा और डॉ. जयदीप मल्होत्रा के प्रयासों से उत्तर प्रदेश के पहले टेस्ट ट्यूब बेटी का जन्म कराया गया।
आगरा के इतिहास में 23 वर्ष पूर्व 1 अगस्त, 1998 को विज्ञान की एक बड़ी उपलब्धि दर्ज हुई। टेस्ट ट्यूब बेबी का नाम उत्सव रखा गया। उत्सव आज 23 साल का हो चुका है। उत्सव के दो महीने बाद ही मल्होत्रा टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर में ही दूसरे आईवीएफ बेबी ने जन्म लिया और वर्ष 2013 तक यहां 2000 से अधिक परखनली शिशु जन्मे। यह कारवां धीरे-धीरे बढ़ने लगा और वर्ष 2013 में ही आगरा में रेनबो आईवीएफ सेंटर की स्थापना के बाद इस केंद्र की नेपाल, बांग्लादेश, लुधियाना, जालंधर, हिसार, दिल्ली, बरेली, इलाहाबाद, वाराणसी आदि 18 शाखाओं को मिलाकर करीब 12 हजार से अधिक आईवीएफ शिशुओं का जन्म कराया जा चुका है।
डॉ. जयदीप एवं नरेंद्र मल्होत्रा
- फोटो : अमर उजाला
भारत में इनफर्टिलिटी एक आम समस्या है। यहां हर चार में से एक दंपती बच्चा पैदा करने में परेशानी का सामना करते हैं। इस बारे में खुलकर चर्चा करने से हिचकते हैं जिससे इस बीमारी के इलाज में बाधा आती है। विश्व आईवीएफ दिवस के मौके पर यह कहना है उत्तर प्रदेश का पहला आईवीएफ बेबी देने वाले और आगरा में रेनबो आईवीएफ के निदेशक डॉ. जयदीप मल्होत्रा और डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा का।
उन्होंने जानकारी दी कि दुनिया की पहली टेस्ट ट्यूब बेबी लुईस ब्राउन का जन्म 1978 में 25 जुलाई को हुआ था और भारत की 6 अगस्त 1986 को। इसके 11 साल बाद आगरा के मल्होत्रा टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर में। यहां डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा और डॉ. जयदीप मल्होत्रा के प्रयासों से उत्तर प्रदेश के पहले टेस्ट ट्यूब बेटी का जन्म कराया गया।
आगरा के इतिहास में 23 वर्ष पूर्व 1 अगस्त, 1998 को विज्ञान की एक बड़ी उपलब्धि दर्ज हुई। टेस्ट ट्यूब बेबी का नाम उत्सव रखा गया। उत्सव आज 23 साल का हो चुका है। उत्सव के दो महीने बाद ही मल्होत्रा टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर में ही दूसरे आईवीएफ बेबी ने जन्म लिया और वर्ष 2013 तक यहां 2000 से अधिक परखनली शिशु जन्मे। यह कारवां धीरे-धीरे बढ़ने लगा और वर्ष 2013 में ही आगरा में रेनबो आईवीएफ सेंटर की स्थापना के बाद इस केंद्र की नेपाल, बांग्लादेश, लुधियाना, जालंधर, हिसार, दिल्ली, बरेली, इलाहाबाद, वाराणसी आदि 18 शाखाओं को मिलाकर करीब 12 हजार से अधिक आईवीएफ शिशुओं का जन्म कराया जा चुका है।
रेनबो आईवीएफ में मनाया जाता है उत्सव-डे
आगरा में पहले आईवीएफ शिशु का जन्म होने के बाद से ही यहां आईवीएफ डे को उत्सव डे के रूप में मनाया जाता है। उन दंपतियों और बच्चों को भी आमंत्रित किया जाता है जो आईवीएफ से यहां पैदा हुए। उत्सव के अलावा आगरा में उसी वर्ष जन्मे दो अन्य टेस्ट ट्यूब बेबी भी अब 23 वर्ष के हो चुके हैं।
तब से अब तक तकनीक काफी बदली
एशरे के यंग एंबेसडर और एंब्रियोलॉजिस्ट डॉ. केशव मल्होत्रा ने बताया कि अब आईवीएफ में आधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं। इसमें 24 घंटे भ्रूण की निगरानी करने वाले एंब्रियोस्कोपी से लेकर आरआई विटनेस तक उपकरण और अत्याधुनिक लैब शामिल हैं। डॉ. केशव के नेतृत्व में चार एंब्रियोलॉजिस्ट की टीम और डॉ. जयदीप एवं डॉ. नरेंद्र के साथ ही डॉ. नीहारिका, डॉ. शैली गुप्ता और डॉ. नीरजा आईवीएफ कंसल्टेंट के रूप में काम कर रहे हैं।
डॉ. जयदीप और डॉ. नरेंद्र की उपलब्धियां
एक ख्याति प्राप्त स्त्री रोग एवं आईवीएफ विशेषज्ञ होने के साथ ही डॉ. जयदीप वर्ष 2018 में देश में डॉक्टरों के सबसे बडे संगठन फॉग्सी की 57 वीं अध्यक्ष हैं। इससे पूर्व डॉ. जयदीप के पति और देश के ख्यातिप्राप्त स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा वर्ष 2008 में फॉग्सी के 47 वें अध्यक्ष रह चुके हैं। डॉ. जयदीप और डॉ. नरेंद्र पहले दंपती हैं जो इस प्रोफेशनल संगठन के अध्यक्ष बने, साथ ही जिन्हें यूके के रॉयल कॉलेज की मानद उपाधि से सुशोभित किया जा चुका है। डॉ. जयदीप डबरोविनिक इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर होने के साथ ही एस्पायर की प्रेसीडेंट, एआईसीओजी की जनरल सेक्रेटरी, सेक्रेटरी जनरल आईएमएस, वाइस प्रेसीडेंट इस्पात समेत कई प्रतिष्ठित संगठनों से जुड़ी हैं। डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा डबरोविनिक इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में प्रो. पद पर कायर्रत हैं। नेपाल, ढाका, कराची, ग्रीस, सिकागो, इंडनबर्ग, क्यूला लंपरू, रामे, अर्जेंटीना, सिंगापुर, श्रीलंका, फिलीपींस, नार्वे, स्वीडन, जर्मनी, यूके आदि में भी विशेषज्ञ के रूप में वह अपने अनुभव साझा करते हैं और करते रहे हैं। डॉ. केशव के साथ ही डॉ. जयदीप, डॉ. नरेंद्र और डॉ. निहारिका वर्तमान में मल्होत्रा एंब्रियोलॉजी ट्रेनिंग एकेडमी (मेटा) को संचालित करते हैं। इसमें नए एंब्रियोलॉजिस्ट, आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को छह माह से एक साल तक के कोर्स का प्रशिक्षण दिया जाता है। विश्व के कई देशों अफ्रीका, बांग्लादेश, नेपाल, मालदीव आदि से आकर डॉक्टर प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। मल्होत्रा टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर और रेनबो आईवीएफ की टीम को अब तक दो बार नेपाल सम्मान से नवाजा जा चुका है। डॉ. मल्होत्रा दंपती के टेस्ट ट्यूब बेबी पर कई शोध पत्र दुनिया के विख्यात जर्नल्स में प्रकाशित किए जा चुके हैं। विश्व भर में जाकर उन्होंने इस विषय पर 500 से अधिक व्याख्यान दिए हैं।
चिकित्सा क्षेत्र में बड़ा योगदान
आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में इनफर्टिलिटी में बढ़ोतरी हुई है। जिसके सफल समाधान के लिए डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा और डॉ. जयदीप मल्होत्रा ने इस क्षेत्र में कार्य करना आरंभ किया और एमजी रोड व सिकंदरा क्षेत्र में इनफर्टिलिटी सेंटर्स की स्थापना की। चिकित्सा विज्ञान पर उन्होंने 100 से अधिक किताबें लिखी हैं। डॉ. नरेंद्र का मानना है कि हर रोगी अलग है और इसलिए हर मामले के लिए प्रोटोकॉल उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
23 साल पहले रीता अहलूवालिया के घर में मना था उत्सव
प्रदेश में आईवीएफ पद्धति अपनाने वाली दयालबाग की रीता अहलूवालिया ने बताया कि आइवीएफ तकनीक से एक अगस्त, 1998 को बेटे का जन्म हुआ। शादी के 10 साल बाद घर में किलकारी गूंजी, सही मायने में उत्सव मना और बेटे का नाम भी यही रखा। अप्रैल में पति कंचन कुमार अहलूवालिया का स्वर्गवास होने के बाद बेटा ही उम्मीद बना हुआ है। बीबीए की पढ़ाई पूरी कर चुके उत्सव बोले कि आईवीएफ तकनीक से शहर और प्रदेश में पहली संतान होने के कारण वह भी आगरा के इतिहास में दर्ज हो गए हैं।