पिछली सरकार के मुखिया अखिलेश यादव ने आईटी पार्क की जगह आईटी सिटी बनाने की बात कही। इसके लिए जमीन नहीं मिली।
मौजूदा सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने आईटी पार्क की योजना को जारी रखा लेकिन फाइलों से आगे बात नहीं बढ़ी।
आईटी पार्क के लिए जमीन चिह्नित हुई, बजट जारी हुआ, इमारत आधी बन चुकी लेकिन सपना 22 साल बाद भी अधूरा है। पहले बसपा और फिर सपा सरकार ने घोषणा की थी कि ताजनगरी में आईटी पार्क बनेगा, इसके बाद योगी सरकार ने इस योजना को जारी रखा लेकिन यह प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सका है। अन्य प्रोजेक्ट पूरे न होने के पीछे जनप्रतिनिधियों के पास सुप्रीम कोर्ट की अनुमति न मिलने की दलील है लेकिन आईटी पार्क में तो ऐसा कोई चक्कर ही नहीं है, क्योंकि यह गैर प्रदूषणकारी इकाई में आता है।
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आईटी पार्क की स्थापना की मांग वर्ष 1998 में उठी। 2004 में प्रस्ताव बन गया। इसके बाद एडीए जमीन देने के लिए राजी हो गया। शास्त्रीपुरम में दो एकड़ जमीन आवंटित की गई। केंद्र सरकार की संस्था साफ्टवेयर टेक्नालॉजी पार्क्स आफ इंडिया (एसटीपीआई) को आईटी पार्क बनाने का जिम्मा दिया गया। इसके बाद एडीए ने जमीन का पैसा मांगा और पेच फंस गया। नए सिरे से प्रस्ताव बना और काम अटक गया।
पिछली सरकार के मुखिया अखिलेश यादव ने आईटी पार्क की जगह आईटी सिटी बनाने की बात कही। इसके लिए जमीन नहीं मिली। मौजूदा सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने आईटी पार्क की योजना को जारी रखा लेकिन फाइलों से आगे बात नहीं बढ़ी।
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जनप्रतिनिधियों को इच्छाशक्ति दिखानी होगी : रक्षित टंडन
इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के साइबर सुरक्षा सलाहकार और आईटी एडवाइजर रक्षित टंडन का कहना है कि शहर के लिए 22 साल से हम आईटी पार्क की मांग कर रहे हैं।
इसके बाद भी कहीं कुछ दिखाई नहीं दे रहा। उन्होंने कहा कि इस समय भारत डिजिटल इंडिया की ओर तेजी से बढ़ रहा है। अगर हम इस नए दौर में चूक गए, तो मुश्किल होगी। जनप्रतिनिधियों को एकजुटता दिखानी होगी, तभी आईटी पार्क मिल पाएगा।
सपने ही देखते रहे हम
पिछले दो सालों से मुंबई में निजी आईटी कंपनी में नौकरी कर रहा हूं। काफी सालों से सुनता रहा कि शहर में आईटी पार्क बनेगा। जब इंजीनियरिंग करना शुरू किया, तब ये लगा कि चार साल तक इंजीनियरिंग पूरी होगी, तब तक पार्क बन जाएगा। नौकरी लगने के बाद भी पार्क नहीं बन सका। आगरा में रहने वाले मेरे कई जूनियर्स भी बाहर जॉब कर रहे हैं।- सार्थक अग्रवाल, विजय नगर कॉलोनी
आईटी पार्क बने तो पलायन रुके
दो साल से पुणे में जॉब कर रही हूं। मुझे तो अभी भी उम्मीद है कि एक न एक दिन हमारे शहर में आईटी पार्क जरूर बनेगा। अगर मेरी ही तरह शहर के तमाम आईटी विद्यार्थियों को नौकरी की सुविधा अपने ही शहर में मिल जाए, तो कोई भी बाहर जाकर नौकरी करने के लिए मजबूर नहीं होगा। इसलिए मेरा मानना है कि जल्द ही शहर में आईटी पार्क बनना चाहिए। -कृति गुप्ता, कमला नगर
युवाओं को होगा फायदा
आगरा में आईटी पार्क नहीं बनने से सबसे बड़ा नुकसान उन लाखों विद्यार्थियों का हो रहा है, जो बीसीए, एमसीए, इंजीनियरिंग करके शहर के बाहर नोएडा, गुडगांव, बंगलूरू, हैदराबाद आदि शहरों में नौकरी कर रहे हैं। आगरा के अलावा फिरोजाबाद, मथुरा, एटा, शिकोहाबाद, मैनपुरी आदि शहरों के विद्यार्थी भी हर साल यहां के तमाम इंजीनियरिंग कॉलेज से पास होकर नौकरी करने के लिए बाहर जाने को मजबूर हैं।