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आगरा: हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी 139 तालाबों से नहीं हटे कब्जे, 18 महीने में नतीजा सिफर

Thu, 02 Sep 2021 02:09 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा

सार

हाईकोर्ट प्रयागराज ने मुख्य सचिव को तालाबों को पुराने मूल स्वरूप में लौटाने के आदेश दिए थे। इसके बाद जिला प्रशासन ने कार्रवाई के लिए कमेटी का गठन किया था। 18 महीने बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक तालाबों से अवैध कब्जे नहीं हटे हैं। 
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तालाब पर हो रहा अतिक्रमण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा जिले में शहर से लेकर गांव-देहात तक तालाबों के अस्तित्व पर संकट है। छह तहसीलों में 139 तालाबों पर अतिक्रमण व पक्के निर्माण हैं। हाईकोर्ट ने सितंबर 2019 में तालाबों को अतिक्रमण मुक्त करा उन्हें पुराने स्वरूप में लौटाने के आदेश दिए थे। 

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जनवरी 2020 में जिलाधिकारी ने एडीएम वित्त की अध्यक्षता में कमेटी बनाई, लेकिन 18 महीने बाद भी नतीजा सिफर है। तालाबों से कब्जे हटे न अतिक्रमण। कार्रवाई तो दूर 12 महीने में वस्तुस्थिति की समीक्षा तक नहीं की गई।

जिले की छह तहसीलों में 3700 से अधिक तालाब हैं। 1952 के राजस्व रिकॉर्ड में रकबा 130 हेक्टेयर से अधिक है। जिनमें 139 पर कब्जे व निर्माण हो चुके है। 1952 के बाद जिला प्रशासन ने तालाबों का सर्वे कराया, न उनका क्षेत्रफल मापा। 

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हाईकोर्ट ने दिया था यह आदेश 
जनहित याचिका 1474/2019 में हाईकोर्ट प्रयागराज ने मुख्य सचिव को तालाबों को पुराने मूल स्वरूप में लौटाने के आदेश दिए। जिसके बाद डीएम प्रभु एन सिंह ने एडीएम वित्त योगेंद्र कुमार की अध्यक्षता में कार्रवाई के लिए कमेटी बनाई। हर छह माह पर कमेटी को समीक्षा करनी थी। 

हैरानी की बात ये है कि 18 महीने में कमेटी ने समीक्षा तक नहीं की। एडीएम का दावा है कि 139 में से 7 तालाबों से कब्जे हटाये गए हैं, लेकिन वह उन तालाबों का ब्योरा नहीं दे सके। ये हाल तब है जब हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई प्रस्तावित है। 

खेरागढ़ के गांव सैंया में तालाब पर अतिक्रमण से जलभराव हो रहा है। इस तालाब के संबंध में हाईकोर्ट ने अगस्त में तहसील प्रशासन को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। यहां 2016 में तत्कालीन एसडीएम के आदेश पर जांच के बाद तालाब भूमि पर कब्जेदारों के विरुद्ध लेखपाल ने एफआईआर कराई थी। फिर भी तालाब पर अवैध निर्माण व दुकानें बन गई हैं।
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40 से अधिक प्रार्थनापत्र दिए
तालाबों की लड़ाई लड़ रहे याचिकाकर्ता एडवोकेट सुरेश चंद सोनी का कहना है कि मैंने 18 महीने में 40 से अधिक प्रार्थनापत्र डीएम, एसडीएम व एडीएम व नगरायुक्त को दिए हैं। प्रशासन आंख मूंद कर बैठा है। उन्होंने तहसील अधिकारियों पर तालाबों पर कब्जा करने वालों से मिलीभगत के आरोप लगाए हैं।

फाइलों में बंद कार्यवृत्त
शहर में 48 तालाब राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है जबकि नगर निगम के रिकार्ड में 40 तालाब हैं। जुलाई में नगरायुक्त निखिल टीकाराम फुंडे ने तालाबों की समीक्षा के बाद उनकी बाड़ लगाने, खोदाई कराने और कब्जा मुक्त कराने के लिए न्यायिक पैरवी के निर्देश दिए थे। दो महीने बाद भी नगर निगम का कार्यवृत्त फाइलों में बंद है। 

जल्द करेंगे समीक्षा
जिलाधिकारी प्रभु एन. सिंह ने बताया कि नाप-तौल कराना व अतिक्रमण हटाना राजस्व टीम का कार्य है। कुछ काम हुए हैं। भविष्य में इसमें और तेजी आएगी। नगर पालिका व ब्लॉक स्तर पर कार्रवाई कराएंगे। जल्द सभी तालाबों की समीक्षा करेंगे। 
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