धूम्रपान नसों का सबसे बड़ा दुश्मन साबित हो रहा है। 20 से 45 वर्ष के बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनकी बारीक नसें सिकुड़ रही हैं और ब्लॉक हो रही हैं। खास बात यह है कि सर्जरी में समस्या होती है। कई बार अंग काटने की स्थिति बन जाती है। ये बातें डॉ. वीएस वेदी ने होटल ताज कन्वेंशन में कहीं।
हैदराबाद से आए डॉ. पीसी गुप्ता ने बताया कि देश भर में महज 750 वैस्कुलर सर्जन हैं। जो कि आबादी के अनुपात में कम है। प्रशिक्षण से इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। एक्सीडेंट में पैर कटने पर मरीज को वैस्कुलर सर्जन के पास भेजना चाहिए। इसमें देरी नहीं करनी चाहिए।
डॉ. संदीप अग्रवाल ने कहा कि पैर में अटैक पड़ता है। पैर ठंडा या नीला पड़ जाता है। जानकारी के अभाव में लोग इसे टालते हैं। एक घंटे के अंदर भी वैस्कुलर सर्जन को दिखा जाए तो वह स्थिति को संभाल सकता है। यदि कुछ समय खड़े रहने पर ही पैरों में थकान और सूजन आ जाती है और नसों में कालापन बढ़ रहा है तो सचेत हो जाएं। यह वैरीकोज वेंस के लक्षण हैं। जिसमें वेरीकोज वेंस के वॉल्व खराब हो जाने से पैरों में नसों के गुच्छे बन जाते हैं।
- चलते समय पैरों की पिंडली में दर्द। रुकने पर आराम मिलना।
- पैर में जख्म हो जाना।
- अंगुली और नाखून में कालापन।
- बैठे-बैठे पैर में दर्द होना, अचानक पैर सुन्न होना।
- तंबाकू और धूम्रपान से बनाएं दूरी।
- प्रतिदिन 5,000-10,000 कदम जरूर चलें।
- खानपान का ध्यान रखें, फास्ट फूड का सेवन न करें।
- ताजा और फाइबर युक्त खाना खाएं।
- शरीर के वजन को संतुलित रखें।