हेल्लो गैंग के तीन ठग गिरफ्तार
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थाना ताजगंज पुलिस और साइबर सेल ने ठगी का कॉल सेंटर चला रहे हेलो गैंग के सरगना पिनाहट निवासी देवकी नंदन सहित तीन को गिरफ्तार किया है। गैंग ऑनलाइन विज्ञापन देकर युवाओं को प्ले ब्वॉय बनाने का झांसा देता था। युवकों के कॉल करने पर खाते में पंजीकरण शुल्क सहित अन्य के नाम पर 50 हजार रुपये तक जमा करा लेते थे। इसके बाद मोबाइल नंबर बंद कर लेते थे। दो साल में सौ से ज्यादा लोगों के साथ ठगी की आशंका है। पुलिस जांच में जुटी है।
थाना ताजगंज के प्रभारी निरीक्षक ओमहरि बाजपेयी ने बताया कि पिनाहट के मोहल्ला मार निवासी देवकी नंदन, रजत गुप्ता और कमला नगर स्थित बालाजी नगर निवासी शिव वर्मा को गिरफ्तार किया है। उनके पास से सात मोबाइल, दो लैपटॉप, एक आई-20 कार, एक स्कूटी और एक डायरी बरामद की गई।
देवकी नंदन गैंग का सरगना है। वह स्नातक पास है। एसएससी की तैयारी करने दो साल पहले आगरा आया था। खर्चे पूरे नहीं होने पर हेलो गैंग बना लिया। रजत गुप्ता और शिव रुपयों के लालच में उनके साथ शामिल हो गया। पहले वो ग्वालियर में ठिकाना बनाए थे। तीन महीने से एडीए हाईट्स के फ्लैट में रहकर गैंग संचालित कर रहा था। गैंग के सदस्य फर्जी आईडी पर सिम खरीदते थे। इनका इस्तेमाल सोशल मीडिया पर विज्ञापन देने में करते थे। लोगों के कॉल करने पर ठगी का शिकार बना लेते थे। साइबर सेल को ठगी की शिकायत मिली थीं।
पर्यटकों को स्पा के नाम पर बनाते थे शिकार
गैंग ताजमहल देखने आने वाले पर्यटकों को भी कॉल करके अपना शिकार बनाता था। उन्हें स्पा के नाम पर युवतियों को भेजने का झांसा दिया जाता था। इससे पर्यटक झांसे में आ जाते थे। पर्यटकों से आनलाइन रुपये खाते में जमा करा लेते थे। इसके बाद मोबाइल नंबर बंद करते थे। बदनामी के डर से पर्यटक पुलिस से शिकायत करे बगैर ही चले जाते थे।
एक व्यक्ति से खाते में जमा करा लेते थे 30 से 50 हजार
पुलिस ने बताया कि आरोपी ऑनलाइन प्ले ब्वाय बनाने का विज्ञापन देते थे। इसमें प्रतिमाह 30 से 50 हजार रुपये की कमाई बताते थे। इसके लिए खाते में कई बार में 30 से 50 हजार रुपये तक जमा करा लेते थे। कई लोगों को ठगने के बाद अपना मोबाइल नंबर बंद कर लेते थे। सिम फर्जी आईडी पर होने के कारण आरोपियों की जानकारी नहीं हो पाती थी।
आईपीएल में सट्टा भी लगाता था गैंग
पुलिस ने बताया कि गैंग का सरगना देवकी नंदन और उसका साथी रजत गुप्ता आइपीएल में सट्टा भी लगाते थे। मैच में हर गेंद पर रुपये लगते थे। लोगों से रकम लेने और बांटने का काम करते थे। उनके दो खातों की जानकारी मिली है। उनमें दो साल में 12 लाख रुपये का लेनदेन हुआ है।