उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में पिछले पांच दिन में सात लोग हार्ट अटैक की वजह से अपनी जान गवां चुके हैं। चिकित्सकों की मानें तो उमस भरी गर्मी दिल की धड़कन बढ़ा रही है। इससे मरीजों का ब्लड प्रेशर हाई हो रहा है। घबराहट और पसीना आने की समस्या के मरीज बढ़ गए हैं। वहीं, हार्टअटैक जैसे लक्षण आने पर रोगी अस्पताल में आ रहे हैं। इसके साथ ही हार्टअटैक से मौत के मामले बढ़े हैं।
मेडिकल कॉलेज का एचडीयू वार्ड फुल चल रहा है। वहीं, आईसीयू वार्ड में बेचैनी और घराहट के मरीज बढ़े हैं। इमरजेंसी में ब्लड प्रेशर बढ़ने के मरीज तेजी से आ रहे हैं। औसतन ओपीडी में इस वक्त 30 फीसदी रोगी इसी तरह के लक्षण वाले आ रहे हैं। मेडिसन विभाग के विभागध्यक्ष डाॅ. मनोज कुमार का कहना है कि उमस का असर व्यक्ति के नर्वस सिस्टम पर आता है। इससे कुछ न्यूरो रसायन का रिसाव बढ़ता है और प्रतिकूल लक्षण हृदय पर आता है। मौसम का बदला हुआ मिजाज सेहत पर असर डाल रहा है।
खासतौर पर जो हृदय रोगी हैं, उन पर असर दिखने लगा है। उन्होंने कहा कि रोगी दिल की बढ़ी धड़कन के लक्षण के साथ आ रहे हैं। बाईं तरफ छाती में चुभन और अधिक पसीना आने के लक्षण भी रोगियों में मिल रहे हैं। ओपीडी में औसत 400 रोगी आ आते हैं। इनमें करीब 100 से 120 रोगी इसी तरह के लक्षण वाले होते हैं। जिन रोगियों के लक्षण जटिल होते हैं, उन्हें भर्ती कर लिया जाता है। उन्होंने बताया कि इस मौसम में शरीर में हार्मोनल रिसाव बढ़ जाता है।
न्यूरो केमिकल का सामंजस्य बिगड़ जाता है। इसका असर दिल पर आता है। स्थिति का सामना करने के लिए दिल अपनी गतिविधियां बढ़ाता है, जिसकी वजह से हार्ट रेट और बीपी बढ़ जाता है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में देखें तो बीते पांच दिनों में सात लोगों की हार्ट अटैक से मौत हो चुकी है।
ऐसे कर सकते हैं बचाव
एयर कंडीशनर में रहें, जिससे उमस न लगे।
एसी न हो तो पंखे में ठंडे स्थान पर रहें।
सुबह और शाम नहाएं
बेवजह बाहर उमस भरे माहौल में न जाएं।
खुद को सहज रखें, किसी बात पर बेवजह तनाव न लें।
जटिल लक्षण उभरें तो अपने डॉक्टर को दिखा दें।
कोई इलाज चल रहा है तो बीच में दवा न छोड़ें।
पुराने रोगों की बढ़ रहीं जटिलताएं
उमस भरे मौसम में हृदय की समस्याओं के अलावा दूसरे रोगों की जटिलताएं बढ़ रही हैं। न्यूरो, पेट रोगी, डायबिटिक, इरिटेबिल बॉवेल सिंड्रोम, अस्थमा, सीओपीडी, लिवर और गुर्दा रोग आदि रोगियों की भी जटिलताएं बढ़ रही हैं। इस तरह के मौसम का प्रतिकूल प्रभाव पूरे शरीर पर पड़ता है। इससे पुराने रोगों के जटिल लक्षण उभरने लगते हैं।