यूपी: अनामिका शुक्ला नाम से नौकरी कर रही शिक्षिका गिरफ्तार, सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई
एक युवती को कासगंज पुलिस ने छह जून को गिरफ्तार किया था। युवती अनामिका शुक्ला के दस्तावेज पर कस्तूरबा विद्यालय फरीदपुर में विज्ञान की शिक्षिका के पद पर नौकरी कर रही थी। बीएसए (बेसिक शिक्षा अधिकारी) ने शिक्षिका के वेतन आहरण पर रोक लगाते हुए नोटिस जारी किया था।जिसके बाद वो अपना इस्तीफा देने आई थी। गिरफ्तार शिक्षिका ने बताया कि मैनपुरी के राज नाम के युवक ने उससे डेढ़ लाख रुपये लेकर जो दस्तावेज दिए थे उनके आधार पर नौकरी की, जबकि उसके मूल दस्तावेज युवक ने खुद अपने पास रख लिए थे। पुलिस पूछताछ में युवती ने अपना नाम सुप्रिया बताया। वो फर्रुखाबाद जिले के लखनपुर की रहने वाली है। मैनपुरी जिले के राज नाम के युवक ने उसे झांसा दिया कि वो ऐसे दस्तावेज उपलब्ध करा देगा कि हर हाल में पूर्णकालिक शिक्षिका के रूप में नौकरी मिल जाएगी।
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'अनामिका' ने हाई मेरिट पर पाई थी 25 जिलों में नौकरी, सभी जगह लगे एक जैसे दस्तावेज
गिरफ्तार शिक्षिका ने अनामिका शुक्ला के दस्तावेज से अगस्त 2018 में 71.89 प्रतिशत कट ऑफ मेरिट के आधार पर नौकरी पाई थी। अब तक की जांच में यह पाया गया है कि जो दस्तावेज अनामिका शुक्ला के कासगंज में लगे हैं, उन्हीं समान अंकों के शैक्षिक दस्तावेज अन्य 24 जिलों में भी है।
अनामिका के शैक्षिक अंक
76.83 प्रतिशत अंक हाईस्कूल की तालिका में हैं।
78.60 प्रतिशत अंक इंटरमीडिएट की अंकतालिका में हैं।
55.61 प्रतिशत अंक बीएससी की अंकतालिका में हैं।
76.50 प्रतिशत अंक टेट की अंकतालिका में हैं।
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कासगंजः बीएसए ने बैंक खाता कराया सीज
शिक्षिका की गिरफ्तारी के बाद उसका बैंक खाता सीज करा दिया है। उसका खाता इलाहाबाद बैंक की कासगंज शाखा में था। यह भी जांच की जा रही है कि शिक्षिका ने बैंक खाता किन-किन दस्तावेजों के आधार पर खुलवाया। शिक्षा विभाग के साथ साथ बैंक भी टीम जांच में जुट गई है। वर्ष 2018 से अब तक की बैंक डिटेल शिक्षा विभाग ने निकलवाई।
- 17 हजार रुपये बैंक खाते में है मौजूदा धनराशि।
- 4.50 लाख रुपये का कासगंज शिक्षा विभाग से भुगतान ले चुकी है शिक्षिका।
- 22 हजार रुपये प्रति महीने शिक्षिका को मिलता था मानदेय।
- 11.29 महीने का हर साल मानदेय मिलता है कस्तूरबा के स्टाफ को।
अनामिका मामला: फर्जी शिक्षिका की संविदा होगी समाप्त, मानदेय की होगी रिकवरी
सुप्रिया ने नौकरी के लिए बेच दी थी भैंस
नौकरी के नाम पर जालसाजों ने अनामिका शुक्ला उर्फ प्रिया उर्फ सुप्रिया से एक लाख रुपये लिए थे। इसके लिए उसके पिता ने 50 हजार रुपये में अपनी भैंस बेच दी। 50 हजार कर्ज लेकर दे दिए। बाद में अनामिका शुक्ला नाम से नौकरी करने को कहा। कहा गया था कि एक साल बाद नाम सुप्रिया हो जाएगा। यह जानकारी फर्जी शिक्षिका के पिता ने पुलिस को पूछताछ के दौरान दी थी। आरोपी शिक्षिका के कई दस्तावेज भी सौंपे थे। पिता ने बताया कि वर्ष 2018 में जालसाज राज और अमरकांत से कायमगंज में मुलाकात हुई थी। दोनों पड़ोस में रहने वाले भाई के यहां आते-जाते थे। उन्होंने बेटी को नौकरी दिलाने का वादा किया। कहा कि एक लाख रुपये देने होंगे। सुप्रिया की कक्षा 10, 12 और बीए के प्रमाण पत्रों की फोटो कॉपी दी। मूल दस्तावेज जालसाजों ने ले लिए थे, वे अभी तक नहीं लौटाए।
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अनामिका प्रकरण में हुआ 'राज' का पर्दाफाश, फर्जीवाड़े का असली मास्टरमाइंड है 'गुरुजी'
अनामिका शुक्ला नाम से फर्जीवाड़ा करने वाले मास्टरमाइंड को पुलिस राज नाम से ढूढ़ रही थी, लेकिन उसका असली नाम कुछ और ही निकला। कासगंज पुलिस ने गुरुवार को मास्टरमाइंड के भाई को गिरफ्तार किया तो इस राज का पर्दाफाश हुआ। कासगंज जिले की सोरों पुलिस ने जसवंत नाम के युवक को गिरफ्तार किया। यह मैनपुरी के भोगांव क्षेत्र के नगला खरा का रहने वाला है। इसका भाई पुष्पेंद्र अनामिका प्रकरण का मास्टरमाइंड है। इसका ही नाम राज है, यही नाम कासगंज से गिरफ्तार फर्जी शिक्षिका सुप्रिया ने पुलिस को बताया था। राज के अलावा पुष्पेंद्र नीतू और गुरुजी नाम से भी जाना जाता है। गिरफ्तार जालसाज ने बताया कि फर्जीवाड़े का खेल सात साल से मैनपुरी सहित अन्य जिलों में चलता रहा। इन सात वर्षों में अलीगढ़, सहारनपुर, रायबरेली, फैजाबाद, अमेठी सहित कई जिलों में जालसाजों ने फर्जी नियुक्तियां कराईं।
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कलावर्ग में स्नातक फेल, विज्ञान शिक्षक के रूप में करता रहा नौकरी
गिरफ्तार जसवंत कन्नौज जिले के एक स्कूल में विभव नाम से नौकरी कर रहा था। वर्तमान में वो स्कूल के प्रभारी प्रधानाचार्य के पद पर तैनात है। जालसाज जसवंत ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि वह बीए (बैचलर ऑफ आट्र्स ) में द्वितीय वर्ष की शिक्षा प्राप्त कर चुका है। वह बीए फेल है। उसने बीए तृतीय वर्ष तक की शिक्षा प्राप्त नहीं की है। उसने विभव कुमार के जिन दस्तावेजों से शिक्षा विभाग में नौकरी हासिल की वह दस्तावेज विज्ञान विषय के हैं। विभव कुमार के बीएससी, बीएड और टेट के दस्तावेज उसने नियुक्ति में लगाए स्वयं कलावर्ग का स्नातक फेल होने पर विज्ञान वर्ग में शिक्षक के रूप नौकरी पा ली। ये गिरोह प्रदेश के कई जिलों में कस्तूरबा व प्राइमरी विद्यालयों में 20 से अधिक फर्जी शिक्षकों को तैनाती दिला चुका है।
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आरोपी तथाकथित शिक्षिका
- फोटो : अमर उजाला
अनामिका शुक्ला के अभिलेखों से नौकरी पाने वाली एक और फर्जी शिक्षिका गिरफ्तार
कासगंज के बाद मैनपुरी जिले से भी एक शिक्षिका को पुलिस ने गिरफ्तार किया गया। आरोप था कि यह शिक्षिका अनामिका शुक्ला के नाम से अंबेडकर नगर जिले के कस्तूरबा गांधी विद्यालय में नौकरी कर रही है। जनपद अंबेडकर नगर के थाना अमापुर पुलिस विगत गुरुवार को थाना बेवर पहुंची। गांव लक्ष्मणपुर गांव से एक महिला को गिरफ्तार किया। पकड़ी गई महिला पहले तो पुलिस को गुमराह करती रही, लेकिन जब महिला कांस्टेबल ने उसे रिहा कराने का लालच दिया तो उसने सच-सच बता दिया। उसने अपना नाम अनीता शाक्य बताया। अनीता शाक्य अंबेडकर नगर के कस्तूरबा गांधी विद्यालय में अनामिका शुक्ला के नाम से नौकरी कर रही थी।
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शिक्षिका अनामिका शुक्ला
- फोटो : अमर उजाला
अनामिका शुक्ला के नाम पर फिर एक बड़ा खुलासा, वार्डन पर गिरी गाज, ये है पूरा मामला
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद में जांच के दौरान खुलासा हुआ है कि सहारनपुर में अनामिका शुक्ला के नाम पर भावना नौकरी कर रही थी। इस मामले में कार्रवाई की गई है और विद्यालय की वार्डन की संविदा समाप्त कर दी। कस्तूरबा गांधी विद्यालय मुजफ्फराबाद में अनामिका शुक्ला के नाम से नियुक्त थी। जांच में पता चला है कि उसके द्वारा जमा कराए गए शैक्षिक प्रमाण पत्र रंगीन फोटो कॉपी हैं। सूत्रों की मानें तो आधार कार्ड की रंगीन फोटो कॉपी मिली है, उसमें बदलाव किया गया है। फर्जी आधार कार्ड के आधार पर बैंक में अनामिका शुक्ला के नाम से खाता कैसे खुल गया।
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कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की शिक्षिका का आधार कार्ड और मार्कशीट
- फोटो : अमर उजाला
प्रयागराज में अनामिका के नाम से नौकरी कर रही थी फर्रुखाबाद की रीना
प्रयागराज के सोरांव गोहरी स्थित बालिका विद्यालय में नौकरी करने वाली अनामिका के दस्तावेजों की छानबीन के दौरान मिला रीना पुत्री चंद्रभान सिंह निवासी रजपालपुर कायमगंज के पते का निवास प्रमाण पत्र फर्जी है। इस गांव के प्रधान व ग्रामीणों ने फोटो देख पहचानने से इनकार कर दिया। उनका कहना था इस नाम की युवती उनके गांव में रहती ही नहीं है। कोतवाली क्षेत्र के गांव रजपालपुर निवासी महिपाल सिंह की पुत्री सुप्रिया के कासगंज में अनामिका नाम से नौकरी करते पकड़े जाने के बाद विगत सोमवार को प्रयागराज के सोरांव गोहरी स्थित बालिका विद्यालय में एक और शिक्षिका अनामिका नाम से नौकरी करते पाई गई।
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गोरखपुर में 11 'अनामिका' अब तक हुईं बर्खास्त, अब भी कई कतार में
गोरखपुर: कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में फर्जी दस्तावेजों के सहारे 25 जनपदों में नौकरी हासिल करने वाली अनामिका शुक्ला का भंडाफोड़ हो चुका है। कई लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। गनीमत है कि गोरखपुर के केजीबीवी में कोई अनामिका शुक्ला कार्यरत नहीं है। मगर परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत 11 'अनामिका' को बेसिक शिक्षा विभाग ने दूसरे के प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी करने के आरोप में बर्खास्त कर चुका है।
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अलीगढ़ से एक और 'अनामिका शुक्ला' गिरफ्तार, रिश्तेदारों पर फर्जी नौकरी लगवाने का आरोप
अलीगढ़ के बिजौली ब्लॉक के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में अनामिका शुक्ला नाम से टीचर की फर्जी नौकरी कर रही बबली यादव को रविवार दोपहर गिरफ्तार कर लिया गया। बबली कानपुर देहात के रसूलाबाद इलाके की रहने वाली है। महिला ने मैनपुरी के अपने रिश्तेदारों पर फर्जीवाड़ा कर नौकरी के रैकेट चलाने का आरोप लगाया है। महिला के अनुसार मैनपुरी के लोगों ने उससे तीन लाख रुपये लेकर नौकरी लगवाई थी। उन्होंने ही उसके फर्जी दस्तावेज तैयार कराने से लेकर बैंक में खाता खुलवाने तक का काम कराया था।
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