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प्रदेश में गंगा किनारे पहला ग्रीन कोरीडोर की हो रही कवायद

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कासगंज में कछला गंगा घाट से बहती गंगा की धार। - फोटो : KASGANJ
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कासगंज। पर्यावरण सुधार के लिए लगातार कवायद का सिलसिला जारी है। अब जिले में गंगा किनारे खादर की जमीनों पर पौधरोपण करके ग्रीन कोरीडोर बनाया जाएगा। यह ग्रीन कोरीडोर यूपी का पहला ग्रीन कोरीडोर बनेगा। इसके लिए जिलाधिकारी की संस्तुति के बाद वन विभाग तैयारियों में जुटा है। कासगंज, सहावर और पटियाली तहसील क्षेत्र में कोरीडोर के लिए गंगा किनारे की खादर की जमीनों को चिह्नित किया जा रहा है।
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गौरतलब हो कि जिले में 1,11 लाख पौधे रोपकर चंदनपुर घटियारी में गंगावन स्थापित किया गया। इसके अलावा पिछले वर्ष दतलाना इलाके में 3.51 लाख पौधे रोपकर भागीरथ वन तैयार किया गया। इन दोनों ही वनों में लाखों की संख्या में लगाए पौधे फल फूल रहे हैं। इन दोनों वनों की स्थापना की सफलता ने ग्रीन कोरीडोर के प्रस्ताव को जन्म दिया।
जिलाधिकारी ने वन विभाग के अफसरों के साथ मंत्रणा की। इसके लिए कासगंज, सहावर और पटियाली तहसील क्षेत्रों में गंगा की खादर की जमीनों को चिह्नित करने के निर्देश जिलाधिकारी ने दिए हैं। भूमि का चिह्नीकरण किया जा रहा है। कासगंज तहसील प्रशासन के द्वारा 800 हेक्टेयर भूमि इस प्रोजेक्ट के लिए चिह्नित की जा चुकी है। सहावर और पटियाली में अभी भूमि चिह्नित नहीं हो सकी है। ग्रीन कोरीडोर के प्रस्ताव पर वन विभाग डीपीआर तैयार कर रहा है।
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जिले में 77 किलोमीटर लंबे इलाके से गंगा की धार गुजरती है। गंगा की खादर की जमीनें काफी हैं। जिन पर तमाम लोगों के अवैध कब्जे भी हैं। ये कब्जे भी प्रशासन हटवाकर भूमि वन विभाग के सुपुर्द करेगा। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। वन विभाग के दावों को मानें तो यह यूपी का पहला ग्रीन कोरीडोर बनेगा जो पर्यावरण संरक्षण के लिए मिसाल साबित होगी।
वर्जन :
गंगा किनारे ग्रीन कोरीडोर बनाने की योजना है। इसका डीपीआर तैयार किया जा रहा है। इस कोरीडोर के लिए खादर की भूमि चिह्नित की जा रही है। चिह्नित भूमि पर पौधरोपण होगा। किसानों की सहभागिता भी सुनिश्चित की जाएगी। यूपी का यह पहला ग्रीन कोरीडोर बनेगा। जिलाधिकारी ने प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। - दिवाकर वशिष्ठ, डीएफओ।
जिले में 77 किलोमीटर लंबी तक गंगा बहती है। ग्रीन कोरीडोर बनने से काफी समस्याएं भी हल होंगी। पर्यावरण के अतिरिक्त यह प्रोजेक्ट बाढ़ और कटान रोकने में मददगार साबित होगा। - अरूण कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई।
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आंकड़े की नजर से -
- 3 तहसीलों में किया जा रहा है भूमि का चिह्नीकरण
- 77 किलोमीटर लंबी है गंगा धारा बहती है जिले में
- 800 हेक्टेअर जमीन कासगंज तहसील में हो चुकी है चिह्नित
- 600 हेक्टेअर जमीन चिह्नित करने में जुटा है तहसील प्रशासन
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