बमरौली अहीर के दीक्षा केसीआर टाउन निवासी विशाल शर्मा ने पुलिस आयुक्त कार्यालय में प्रार्थना पत्र दिया। बताया कि वह बालूगंज स्थित एक स्कूल में पढ़े हैं। वहीं बालूगंज का हर्षित शर्मा भी पढ़ता था। इससे उनमें मित्रता और घर आना-जाना था। हर्षित के पिता जलकल विभाग में थे। उनकी मौत होने पर मृतक आश्रित कोटे में हर्षित की नौकरी लग गई। मार्च 2020 में हर्षित और उसकी मां शशि जीवनी मंडी स्थित खाटू श्याम मंदिर में मिले। दोनों ने बताया कि जलकल महाप्रबंधक आरएस यादव से उनकी घनिष्ठता है। किसी की नौकरी लगवानी हो तो बता देना। एक व्यक्ति के 10 लाख रुपये लगेंगे।
विशाल ने बताया कि सरकारी नौकरी होने की वजह से वह तैयार हो गए। उन्होंने अपने परिचित फिरोजाबाद के गांधी नगर निवासी राहुल, उसके भाई रोहित और इटावा निवासी अमन दुबे से भी बात की। चारों ने रुपयों का इंतजाम कर 32.30 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। 7.70 लाख रुपये बाद में ट्रांसफर किए। 13 जुलाई को हर्षित ने एक नियुक्ति पत्र दिया।
पत्र में रामदत्त की मृत्यु के बाद मृतक आश्रित कोटे में विशाल की नौकरी लगने के बारे में लिखा था। शिकायत पर आरोपियों ने कहा कि नौकरी ऐसे ही लगती है। थाना सदर के प्रभारी निरीक्षक नीरज कुमार शर्मा ने बताया कि तहरीर के आधार पर हर्षित शर्मा, उसकी मां शशि शर्मा और पत्नी अंजलि शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, आपराधिक साजिश और अमानत में खयानत की धारा में केस दर्ज किया है। साक्ष्य संकलन कर कार्रवाई की जाएगी।
चेक दे दिए, नहीं थी खाते में रकम
विशाल ने पुलिस को बताया कि हर्षित ने कहा था कि चारों की नौकरी मृतक आश्रित कोटे में लगवा दी है। चारों नियुक्ति पत्र लेकर जलकल कार्यालय पहुंचे, जहां नियुक्ति पत्रों को फर्जी बताया गया। रुपये वापस मांगे तो उत्कर्ष स्माल फाइनेंस बैंक, संजय प्लेस शाखा के तीन चेक दिए गए। चेक बाउंस हो गए। बताने पर उसने मकान बेचकर रकम अदा करने का झूठा आश्वासन दिया। अब धमका रहा है। फोन उठाने भी बंद कर दिए हैं।
आगरा में ठगों का जाल
आगरा में नौकरी के नाम पर पहली बार धोखाधड़ी नहीं की गई है। जलकल, रेलवे व नगर निगम में नौकरी का झांसा देकर धोखाधड़ी के मामले सामने आ चुके हैं। इस संबंध में थाना जगदीशपुरा, ताजगंज, सदर, हरीपर्वत में मुकदमे भी दर्ज हैं।