छोटे मियां-बड़े मियां की दरगाह
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जलेसर में बड़े मियां दरगाह के बाद अब छोटे मियां दरगाह पर भी प्रशासन की नजर रहेगी। दरअसल इस दरगाह पर भी बड़े मियां दरगाह कमेटी पदाधिकारियों के परिजनों का ही कब्जा था। कार्रवाई होने के बाद ये लोग भी कस्बा छोड़कर भागे हुए हैं। ग्राम पंचायत समिति सहित कुछ स्थानीय लोगों को देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि चढ़ावे में आने वाला पैसा सरकारी कोष में जमा किया जाएगा।
जात के लिए स्थानीय व दूरदराज से आने वाले लोग इन दोनों ही दरगाह पर बुधवार और शनिवार को पहुंचकर पूजा-पाठ करते हैं और चढ़ावे के रूप में यहां काफी रुपये व अन्य सामान आता है। बड़े मियां की दरगाह व शनि मंदिर का महत्व अधिक है। यहां एक प्रबंध समिति बनाई गई थी, जिसके नाम के लिए संचालन किया रहा था, जबकि छोटे मियां दरगाह पर कोई समिति ही नहीं बनी। बड़े मियां दरगाह पर करोड़ों रुपये का घोटाला सामने आने के बाद प्रबंध समिति से जुड़े पदाधिकारी व सदस्य फरार हो गए, जबकि छोटे मियां की दरगाह पर जात कराने वाले लोग भी इसी परिवार के थे, वे भी कार्रवाई के बाद से भागे हुए चल रहे हैं।
ऐसे में बुधवार की जात के लिए जलेसर देहात ग्राम पंचायत से समिति और जैन समाज से जुड़े कुछ लोगों को देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई। जैन समाज का दावा है कि उनका एक हिस्सा दरगाह में है। बुधवार को इन्हीं लोगों की देखरेख में श्रद्धालुओं को जात कराई गई। एसडीएम ने बताया कि इस दरगाह के स्वामित्व, चढ़ावा आदि को लेकर भी जांच की जा रही है। गड़बड़ी मिलने पर यहां भी कार्रवाई की जाएगी।
विधायक से लेकर क्षेत्रीय प्रधान कर रहे ये दावा
तमाम आम लोगों के अलावा क्षेत्रीय विधायक संजीव दिवाकर और जलेसर देहात ग्राम पंचायत प्रधान शीलेंद्र सिंह इस स्थान पर शनिदेव मंदिर का दावा कर चुके हैं। उनका कहना है कि प्राचीन काल से इस स्थान पर शनिदेव का मंदिर स्थापित था। बाद में दरगाह कमेटी से जुड़े लोगों ने अतिक्रमण कर निर्माण कर लिया। धीरे-धीरे मंदिर का अस्तित्व खत्म करते गए।