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आगरा: नकली खाद ऐसी कि पहचान करना मुश्किल, मिट्टी-जिप्सम से बन रही डीएपी, ऐसे करें पहचान

Fri, 12 Nov 2021 02:54 PM IST
Abhishek Saxena अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

नकली डीएपी निर्माण से लेकर पैकिंग तक में धांधली कर रहे खाद भंडार संचालक, नकली खाद बनाने पर तीन एफआईआर, 10 दुकानों के खिलाफ कालाबाजारी में कार्रवाई
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आगरा: नकली खाद फैक्टरी पकड़ी (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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डीएपी की किल्लत के बीच मुनाफाखोरी ही नहीं हो रही बल्कि नकली डीएपी निर्माण से लेकर पैकिंग तक में धांधली भी हो रही है। तीन उदाहरण तो बानगी हैं, जिले में 850 खाद की दुकानें हैं। जिनमें बीते एक माह में 250 की जांच हो सकी है। एक-एक दुकान को खंगाला जाए तो देहात में नकली खाद, बीज व कीटनाशक के बड़े रैकिट का भंडाफोड़ हो सकता है। 
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जिला कृषि अधिकारी विनोद सिंह ने बताया कि पैकिंग को देखकर नकली या असली का पता नहीं लगा सकते। किसान चकमा खा जाते हैं। नकली उर्वरक बनाने और पैकिंग के मामले में तीन एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। अन्य दुकानों की जांच जारी है। चित्राहाट में 250 कट्टे नकली डीएपी सीज किया था। इनके अलावा डीएपी की कालाबाजारी करने पर पांच दुकानों के लाइसेंस निलंबित किए हैं। दो दुकानों के लाइसेंस निरस्त हो चुके हैं। सात दिन में जवाब मांगा है। जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर निलंबित लाइसेंस भी निरस्त किए जाएंगे। 
केस-एक
अछनेरा में रेलवे कॉलोनी के पास कैमीनेक्स एग्री साइंसेज गोदाम पर नकली डीएपी की आशंका पर छापा मारा। डीएपी के कट्टे में जिप्सम व मिट्टी भरी थी। नमूना भरकर जांच को भेजा तो रिपोर्ट में नकली खाद की पुष्टि हुई।
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केस-दो
एत्मादपुर के कुबेरपुर में रहनकलां रोड पर एक गोदाम में नकली उर्वरक बनने की सूचना मिली। डीएपी की जांच के लिए नमूना भेजा, तो नाइट्रोजन 18 फीसदी की जगह तीन फीसदी और सल्फर 46 फीसदी की जगह चार फीसदी मिली।
केस-तीन
जैतपुर कलां, चित्राहाट में आराध्या खाद भंडार के गोदाम की जांच में साबुन, डिटरजेंड पाउडर व जिप्सम मिलाकर डीएपी की पैकिंग होती मिली। नमूना जांच को भेजा तो डीएपी नकली मिली। यहां पैकिंग मशीन जब्त की गई। मुकदमा दर्ज कराया गया।
 
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ऐसे पहचानें असली डीएपी
- असली डीएपी में नाइट्रोजन और सल्फर का अनुपात 18/46 होता है।
- डीएपी को चूने के साथ हाथ पर रगड़ने से तीक्ष्ण गंध आती है।
- डीएपी से अगर तीक्ष्ण गंध न आए तो वह उर्वरक संदिग्ध हो सकता है।
- असली डीएपी तवे पर रखकर हल्का सेकने पर फूले की तरह हो जाती है।
19 हजार मीट्रिक टन का आवंटन, मिली 5500 टन
खेतों में आलू व गेहूं की बुवाई जोरों पर है। नवंबर में 19 हजार मीट्रिक टन डीएपी का आवंटन आगरा के लिए हुआ है। बृहस्पतिवार तक आगरा के किसानों के लिए 5500 मीट्रिक टन डीएपी आई है। ऐसे में डीएपी किल्लत बरकरार है। कृषि अधिकारी विनोद सिंह का कहना है कि दो-तीन दिन में और नई रेक आनी वाली हैं। जिसके बाद आपूर्ति सामान्य हो जाएगी।
नहीं चला सर्वर, घंटों इंतजार
डीएपी की शिकायतों को लेकर जिला प्रशासन ने कंट्रोल रूम बनाया है। बृहस्पतिवार को शमसाबाद, पिनाहट और बाह से खाद विक्रेताओं पर पॉश मशीनों का सर्वर नहीं चलने से डीएपी नहीं मिलने की शिकायतें आईं। किसानों ने दुकानों पर हंगामा किया। जिसके बाद उनके नाम, पते और मोबाइल नंबर दर्ज करा डीएपी बेची गई। उनके आधार कार्ड रख लिए, जो बायोमैट्रिक पहचान के बाद वापस किए जाएंगे।

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