बाह: चित्रा इंडिका कछुआ के बटेश्वर में सहेजे गये अंडे
बाह। चंबल ही नहीं, बल्कि यमुना नदी में भी पिछले दिनों पतले सिर वाले सॉफ्टशेल (चित्रा इंडिका) कछुओं के अंडे मिले हैं। अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) की रेडलिस्ट में लुप्तप्राय सूचीबद्ध चित्रा इंडिका कछुए के अंडों को बटेश्वर में हैचिंग के लिए संरक्षित किया गया है। बाह के रेंजर अमित कुमार ने बताया कि अंडों की हैचरी बनाकर वन विभाग की टीम नियमित रूप से पहरेदारी कर रही है।
यमुना नदी में इसके अंडे मिलने के बाद वाइल्ड लाइफ सर्वाइवल एलायंस (डब्ल्यूएसए) की टीम ने शुक्रवार को बटेश्वर पहुंचकर जलीय जीवों को संरक्षित करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम किया। यमुना नदी में चित्रा इंडिका के अलावा अन्य जलीय जीवों का महत्व समझाते हुए डब्ल्यूएसए की अरुणिमा सिंह ने तटवर्तीय ग्रामीणों को जलीय जीवों के संरक्षण और उन्हें सुरक्षित रखने की शपथ दिलाई। इससे पहले टीम ने 16 से 18 सितंबर तक सूर सरोवर पक्षी विहार में सर्वे एवं जागरूकता अभियान चलाया था। इस दौरान बाह के रेंजर अमित कुमार, शिवम यादव, यतेन्द्र सिंह और सदानंद यादव आदि मौजूद रहे।
एक बार में 60 से 200 अंडे तक देती है मादा कछुआ
चित्रा इंडिका कछुए मानसून के ठीक बाद जुलाई से नवंबर तक प्रजनन करते हैं। मादा कछुआ घोंसले के लिए नदी के किनारे की बालू में गहरे गड्ढे खोदती है और रात या शाम के समय अंडे देती है। बाह के रेंजर अमित कुमार ने बताया कि एक बार में मादा कछुआ 60 से 200 अंडे तक देती है। इन अंडों से बच्चे निकलने में 40 से 70 दिन का समय लगता है, जिसकी सुरक्षा के लिए टीम पूरी तरह सतर्क है।