आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की ओर से स्नातक पाठ्यक्रमों में नई शिक्षा नीति के अनुरूप लागू किए जा रहे न्यूनतम समान पाठ्यक्रम के क्रियान्वयन अध्यादेश का मसौदा तैयार कर लिया गया है। मसौदे पर सुझाव आमंत्रित करने के लिए इसे आवासीय इकाई के निदेशक व विभागाध्यक्षों के व्हाट्स ग्रुप और संबद्ध कॉलेजों के प्राचार्यों के व्हाट्सएप ग्रुप पर डाल दिया गया है। इस पर शनिवार की शाम पांच बजे तक सुझाव दे सकते हैं।
विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने बताया कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप पाठ्यक्रम का संचालन अध्यादेश के अनुरूप होगा। जिसमें छात्रों का प्रवेश कैसे होगा, कक्षाओं का संचालन कैसे किया जाएगा, परीक्षा की व्यवस्था क्या होगी और मार्कशीट व डिग्री कैसे दी जाएगी, ये सारे प्रावधान हैं। उन्होंने बताया कि पांच सदस्यीय समिति ने मसौदा तैयार किया है। इसमें डीन रिसर्च प्रो. अजय तनेजा, आईईटी के निदेशक प्रो. वीके सारस्वत, गणित विभाग के प्रो. संजीव कुमार, सेंट जोंस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह, सहायक कुलसचिव परीक्षा पवन कुमार हैं।
प्रभारी कुलपति ने बताया कि अच्छे सुझावों को मसौदे में शामिल किया जाएगा। इसको विश्वविद्यालय की विद्या परिषद और कार्य परिषद में रखा जाएगा। उसके बाद मसौदे का प्रस्ताव राजभवन को भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद अध्यादेश तैयार हो जाएगा। उसके अनुरूप स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश, पढ़ाई, परीक्षा और परिणाम की व्यवस्था की जाएगी। मसौदे में ही वोकेशनल कोर्सेज के संबंध में निर्देश दिए हुए हैं।
मसौदे की मुख्य बातें
. 75 फीसदी वाह्य और 25 फीसदी आंतरिक मूल्यांकन की व्यवस्था होगी।
. सेमेस्टर परीक्षा होगी और च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) लागू होगा।
. एक वर्ष का सर्टिफिकेट कोर्स होगा। उसको छात्र-छात्राएं चार वर्ष में पूरा सकते हैं।
. डिप्लोमा प्रमाणपत्र दो वर्ष की पढ़ाई के बाद मिलना है, इसके लिए वह तीन वर्ष का भी समय ले सकता है।
. तीसरे वर्ष छात्रों को डिग्री मिलनी है, इसके लिए वह तीन वर्ष और ले सकता है।