उन्होंने बताया कि किसी एक मर्ज में विशेषज्ञ दांत, आंख, त्वचा और किडनी के इलाज में विशेषज्ञ नहीं हो सकता है। वैसे भी एक चिकित्सक एक ही चिकित्सकीय संस्थान में पूर्णकालिक सेवाएं दे सकता है। जांच में पाया गया है कि तीन-चार मामलों में डिग्री केवल पैथोलॉजिस्ट की होने पर भी डेंटल क्लीनिक और किडनी अस्पताल तक का पंजीकरण कराया हुआ है। एक चिकित्सक की डिग्री पर विभिन्न चिकित्सकीय संस्थान पंजीकृत करा संचालित किए जा रहे हैं। संदिग्ध चिकित्सकीय संस्थानों पर टीम छापा मार रही है। ऐसे सभी संस्थानों के लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे।
यह भी पढ़ेंः- चंबल का एक थाना ऐसा भी: बदमाशों से नहीं, बिच्छुओं से खौफजदा हैं पुलिसकर्मी, वर्दी तो कभी जूते में घुसकर काटते
एक विशेषज्ञ चिकित्सक कई रोगों का विशेषज्ञ नहीं
जांच न पड़ताल, आंख मूंदकर दे दिए लाइसेंस
स्वास्थ्य आरटीआई कार्यकर्ता शफी हैदर जाफरी का कहना है कि 15 डॉक्टरों के नाम से 449 चिकित्सकीय संस्थान खुल गए इसमें स्वास्थ्य विभाग की भी मिलीभगत है। इनके रिकॉर्ड और चिकित्सकीय संस्थानों की भौतिक सत्यापन क्यों नहीं किया। यहां तक कि एक विधा में माहिर डॉक्टर की डिग्री पर कैसे अलग-अलग विधा के चिकित्सकीय संस्थान चलते रहे। इसके खिलाफ कोर्ट में जाएंगे।