मां बोली- मेरी आंखों के सामने फांसी पर लटकें
मां भी दोषियों को फांसी की सजा सुनाए जाने के समय पर कोर्ट रूम में उपस्थित थीं। उन्होंने कहा कि सजा का ऐलान होते ही इंसाफ की उम्मीद पूरी हो गई। जिस दरिंदगी के साथ बेटी को मौत के घाट उतारा है, चाहती हूं कि दरिंदों को ऐसी ही मौत मिले ताकि भविष्य में किसी की बेटी की जघन्य हत्या न हो। उन्होंने कहा कि इच्छा है कि मेरी आंखों के सामने ही दरिंदे फांसी पर लटकें। उनको मरते हुए देखने के बाद ही मेरे कलेजे को ठंडक पहुंचेगी। डेढ़ साल एक एक दिन गिन कर गुजारे हैं, ईश्वर से हर रोज दरिंदों को फांसी की सजा की दुआ मांगी है। दुआ कबूल हुई, अब अपनी आंखों के सामने दरिंदों को फांसी पर लटकते हुए देखने के लिए ईश्वर से प्रार्थना करूंगी।
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साइकिल के साथ जुड़ी हैं मासूम की यादें, जब भी बच्चे उठाते, रो पड़ते थे परिजन
घर में बेटी की साइकिल पड़ी हुई है। घर के बच्चे जब भी साइकिल उठाते, देख कर दादा, दादी, मां रो पड़ती थीं। उन्होंने बताया कि जब बच्चे ज्यादा जिद पकड़ने लगे तो साइकिल की गद्दी निकाल कर रख दी थी। बेटी के साथ जुड़ी साइकिल की यादें परिवार के जेहन में आज भी हैं। उसकी जिद पर ही साइकिल ली गई थी। कैसे उसे साइकिल चलाना सिखाया, अपनी दादी को साइकिल पर बैठने के लिए जिद करने की बात हो या फिर कहानी सुनाने की, 6 साल के जीवन का सफर इंसाफ के साथ परिजनों को याद आ गया।
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