साइबर अपराधियों ने रोजगार दिलाने का झांसा देकर उनसे दस हजार रुपये खाते में जमा करा लिए। धोखाधड़ी का पता चलने पर शिवराज सिंह ने गृह मंत्रालय में शिकायत की। इस पर डीजीपी उत्तर प्रदेश को निर्देशित किया गया। वहां से उत्तर प्रदेश साइबर रेंज मुख्यालय को जांच के निर्देश आए थे।
राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि सर्विलांस की मदद से आरोपियों के बारे में जानकारी जुटाई गई। जिस खाते में रकम जमा हुई थी, उनके बारे में पता किया। कॉल डिटेल निकाली गई। मथुरा के थाना शेरगढ़ के गांव बाबूगढ़ निवासी तौफीक और उसके भाई शहजाद का नाम आने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
गांव बाबूगढ़ के ही रहने वाले शाहरूख, मौसम और पप्पी भी गैंग के लिए काम करते हैं। तीनों फरार हैं। आरोपियों के पास से चार मोबाइल, आठ एटीएम, दो आधार, दो पेन कार्ड, एक हेल्थ कार्ड बरामद किए हैं।
दो साल से कर रहा साइबर ठगी
तौफीक दो साल से इस काम में लगा है। अब तक 50 से अधिक लोगों से खाते में रकम जमा करा चुके हैं। उनके मोबाइल की कॉल डिटेल में हजारों नंबर मिले हैं। हालांकि आरोपियों ने 15 लोगों से ही ठगी की बात स्वीकार की है। पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि आरोपी मौसम और शहजाद इंटरनेट से लोगों की जानकारी लेते थे। उनके गैंग का ठिकाना यमुना किनारे पर एकांत में है।
यहां से लोगों को कॉल करते। किसी को रिश्तेदार और परिचित बताते थे। इसके अलावा नौकरी, वर्क फ्रॉम होम का लालच भी देते थे। खातों में जमा होने वाली रकम को शाहरूख निकालकर देता था। इसके बदले में वह 20 प्रतिशत रकम लेता था। बाकी धनराशि को तौफीक, मौसम और शहजाद आपस में बांट लेते।