कीचड़भरे रास्ते से निकलने में दो घंटे लगे
चंबल के दूरस्थ बीहड़ में बसे गुढ़ा गांव से सिमराई तक करीब 4 किमी का कच्चा रास्ता है। बारिश के कारण दलदल और फिसलन हो गई है, जिससे पैदल या बाइक से निकलना मुश्किल हो गया है। सिमराई के प्रधान ने बताया कि मगरमच्छ के हमले में घायल को ट्रैक्टर पर बैठाकर बाह तक लाना पड़ा। 4 किमी के बीहड़ के दलदल भरे रास्ते को पार करने में 2 घंटे लगे।
पिछले साल मगरमच्छ से बेटे ने बचाई थी पिता की जान
पिछले साल 25 जुलाई को बासौनी के झरनापुरा गांव के पास चंबल नदी में पानी भरने गए वीरभान सिंह को मगरमच्छ खींचकर ले जा रहा था। बाहर खड़े 9 साल के बेटा अजयराज निषाद अपनी जान की परवाह किए बिना नदी में कूद गया। बहादुरी के साथ उसने मगरमच्छ के सिर पर पिता को छोड़ने तक डंडों से ताबड़तोड़ प्रहार किया। अजयराज के साहसिक कारनामे की जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंची। उनके प्रस्ताव पर 26 दिसंबर, 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अजयराज को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया था। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, फतेहपुर सीकरी के सांसद राजकुमार चाहर ने भी अजयराज के साहस के मुरीद हुए और सम्मानित किया था।