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कोरोना का आंखों पर असर: संक्रमण से सूख गए आंसू, तेज रोशनी बर्दाश्त नहीं, बरतें ये सावधानियां

Wed, 01 Sep 2021 12:19 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा

सार

एसएन मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. हिमांशु यादव ने बताया कि कोविड से ठीक हो चुके ओपीडी में आए 150 में करीब 40 मरीजों में ड्राई आई सिंड्रोम की परेशानी मिली है। जांच करने पर आंखों की टियर फिल्म (तरल पदार्थ से बनी परत) में दिक्कत मिली। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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कोरोना संक्रमण ने आंखों पर भी बुरा असर डाला। लोगों की आंखों में नमी (ड्राई आई सिंड्रोम) में कमी हो गई। आंसू सूख रहे हैं, कम बन रहे हैं। नजर कमजोर हुई है। फोटो फोबिया की भी दिक्कत मिली। इसमें तेज रोशनी बर्दाश्त नहीं होती। शुरुआत में परेशानी को सामान्य समझा, आराम नहीं मिलने पर एसएन मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग को दिखया। चिकित्सकों को यह परेशानी मिली है। 

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एसएन मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. हिमांशु यादव ने बताया कि कोविड से ठीक हो चुके ओपीडी में आए 150 में करीब 40 मरीजों में ड्राई आई सिंड्रोम की परेशानी मिली है। जांच करने पर आंखों की टियर फिल्म (तरल पदार्थ से बनी परत) में दिक्कत मिली। आंसू बनने की क्षमता प्रभावित हुई। जितने आंसू बन रहे हैं उनकी गुणवत्ता भी बेहतर नहीं मिली। मरीजों से पता चला कि अधिकांश मरीज संक्रमण के दौरान गंभीर हाल में रहे, आईसीयू में भी भर्ती होना पड़ा। स्टेरॉयड भी दिए गए। वह ठीक से सो भी नहीं पा रहे थे। इससे आंखों में सूजन, करकराहट, खुजली, जलन की परेशानी हुई। जिसे शुरुआत में नजरअंदाज किया। दिक्कत बढ़ने पर डॉक्टरों को दिखाया। 
डॉ. यादव ने बताया कि इलाज से 60 से 80 दिन में परेशानी ठीक हो रही है। दो से तीन फीसदी मरीजों में फोटो फोबिया मिला। इसमें तेज रोशनी से आंखों में परेशानी होती है, सिर में दर्द भी होने लगता है। मरीज असहज हो जाता है।  

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मधुमेह, बीपी, थायरायड के मरीजों में अधिक दिक्कत
एसएन की कॉर्निया विशेषज्ञ डॉ. शेफाली मजूमदार ने बताया कि ड्राई आई सिंड्रोम की परेशानी संक्रमण से ठीक हुए उन लोगों में ज्यादा मिली, जो मधुमेह, थॉयरायड और उच्च रक्तचाप के मरीज हैं और दवाएं भी ले रहे हैं। ऐसे मरीजों को कृत्रिम आंसू डालने की ड्रॉप भी दी जा रही है। इन मरीजों की उम्र 50 साल से अधिक है। इस उम्र में सामान्य रूप से भी आंखों में नमी की कमी होने लगती है लेकिन संक्रमण के चलते दर अधिक रही।

ये बरतें सावधानी
- करकराहट, जलन और आंखों में सूजन पर विशेषज्ञ को दिखाएं। 
- चिकित्सक के परामर्श पर आंखों में नियमित ल्युब्रिकेंट डालें।
- आंखों को रगड़े नहीं, इससे कार्निया पर जख्म हो सकते हैं।
- मोबाइल, कंप्यूटर समेत इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का कम इस्तेमाल करें।
(जैसा कि डॉ. हिमांशु यादव ने बताया)
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