शहीद-ए-आजम भगत सिंह के सहयोगी और काला पानी की सजा काटने वाले ठाकुर राम सिंह के अथक प्रयासों के बाद शहीद स्मारक का निर्माण हो सका था। शासन से लेकर प्रशासन तक गुहार लगाने वाले के बाद यह बुलंद खड़ा हुआ। ठाकुर राम सिंह अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनके लगभग सभी क्रांतिकारी साथियों को भी मृत्यु हो चुकी है। निर्माण के कुछ वर्षों तक तो यहां व्यवस्थाएं दुरुस्त रहीं लेकिन अब हालात बहुत ही खराब हैं।
परिसर में लगी मूर्तियां टूटने लगी हैं। एक मूर्ति जमीन पर गिर पड़ी है। मूर्तियों पर पक्षी बैठ कर उन्हें गंदा न करें, इसके लिए शेड लगाई गई थी, वो भी गायब होने लगी है। स्मारक समिति ने कई बार स्थानीय प्रशासन से व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की मांग की है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। यही हाल रहा तो वो दिन दूर नहीं जब, यहां के हालात पूरी तरह से बिगड़ जाएंगे।
मंच के पीछे उग आया जंगल
स्मारक के मंच के पीछे पूरा जंगल उग आया है। यहां बनाए गए फव्वारों की हालत खरीब है। कई फव्वारों के लोहे का पाइप ही गायब हो गया है। पानी के पॉन्ड की बाउंड्री कई जगह से टूटी पड़ी है। बरसों से इन फव्वारों से पानी नहीं निकला है। स्मारक में लोगों की आमद भी कम हो गई है। सर्दियों में जरूर कुछ लोग धूप सेंकने आ जाते हैं लेकिन गर्मियों में तो शाम को भी लोग यहां नहीं आते।