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सामूहिक रूप से किया गया कार्य अच्छा फल देता है

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छीपीटोला स्थित निर्मल सेवा सदन में पूजा करते जैन समाज के लोग। संवाद - फोटो : Agra City
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आगरा। निर्मल सदन, छीपीटोला में चल रहे श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में मंगलवार को मंगलाष्टक पाठ और जिनेंद्र भगवान की शांतिधारा की गई। इंद्र-इंद्राणियों के स्वरूप ने सिद्ध भगवान को 516 अर्घ्य समर्पित किए। प्रवचन में मुनि वीर सागर महाराज ने कहा कि सामूहिक रूप से किया गया कार्य अच्छा फल देता है। पूजा-पाठ करना अच्छे भावों को बनाने के निमित्त हैं। भावात्मक पूजा करने से जीवन में आचरण आ जाता है।
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मुनि विशाल सागर महाराज ने एक प्रसंग में कहा कि अपने परिग्रह का प्रायश्चित करने के लिए अपनी कमाई का 25 फीसदी दान करना चाहिए। अपनी आत्मा को शुद्ध करने के लिए स्वर्ण के समान जिनालय बनवाना चाहिए।
श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में राकेश जैन और भावेश ने अष्ट द्रव्य से जिनेंद्र भगवान की पूजा कराई। मीडिया प्रभारी दिलीप जैन के मुताबिक बुधवार को विधान की आखिरी पूजा और विश्वशांति महायज्ञ होगा। कार्यक्रम में मंदिर कमेटी के अध्यक्ष दिलीप जैन, पन्नालाल बैनाड़ा, रिखवचंद्र जैन, हजारीलाल जैन, रामस्वरूप जैन, वीरेंद्र जैन, जयकुमार जैन, दिनेश जैन आदि मौजूद रहे।
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