फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी: बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी पर धोखाधड़ी में आरोप तय, अब 12 अक्तूबर को होगी सुनवाई

Sat, 09 Oct 2021 12:08 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा

सार

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी के दौरान मुख्तार अंसारी ने कहा कि शुक्रवार सुबह 10:30 बजे बिना प्रशासनिक अधिकारियों के बांदा जेल में एसपी आए। उनके साथ 15-20 पुलिसकर्मी थे। उन्होंने वर्दी नहीं पहनी थी। उनकी बैरक की तलाशी ली। आरोप लगाया कि उन्हें भय है कि कहीं कोई आपराधिक वस्तु रखकर कोई नया केस में न फंसा दें। उनकी हत्या भी की जा सकती है। विधायक के अधिकारों का हनन किया। तलाशी के दौरान अपमानित भी किया।
विज्ञापन
मुख्तार अंसारी - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बांदा जेल में बंद बाहूबली विधायक मुख्तार अंसारी की शुक्रवार को 22 साल पुराने केस में विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) नीरज गौतम की कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने मुख्तार अंसारी पर धारा 419 (किसी दूसरे व्यक्ति के नाम से मोबाइल का सिम लेना) और 420 (धोखाधड़ी) में आरोप तय कर दिए। किसी और धारा में आरोप सही नहीं माने। अब इस मामले में अगली सुनवाई 12 अक्तूबर को होगी। 

विज्ञापन

कोर्ट में अंसारी पर आरोप तय करने को लेकर ढाई घंटे मुख्तार अंसारी के अधिवक्ता रवि अरोरा और एडीजीसी शशि शर्मा के बीच बहस हुई। अधिवक्ता रवि अरोरा ने कहा कि मुख्तार अंसारी को झूठा फंसाया है। धारा 109 (अपराध के लिए उकसाना) और धारा 120 बी (षडयंत्र) का कोई साक्ष्य नहीं मिला। प्रार्थना पत्र दिया कि जेल की तीन महीने की सीसीटीवी कैमरों के फुटेज और जेल की डायरी तलब की जाए। ताकि यह पता चले कि कौन-कौन लोग जेल में आए। एडीजीसी शशि शर्मा ने आरोपों का विरोध करते हुए तर्क दिया कि मुख्तार अंसारी शासन-प्रशासन पर बेवजह झूठे आरोप लगा रहे हैं।
12 अक्तूबर को होगी सुनवाई
कोर्ट ने मुख्तार अंसारी पर धारा 419 और 420 में आरोप तय किए। यह भी कहा कि अगर, भविष्य में धारा 109 और 120 बी में किसी तरह का साक्ष्य मिलता है तो उनमें भी आरोप तय कर मुकदमा चलेगा। कोर्ट ने आरोप तय करने के बाद गवाही के लिए 12 अक्तूबर की तिथि नियत की है।

विज्ञापन
विज्ञापन

बांदा एसपी पर अपमानित करने का आरोप
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी के दौरान मुख्तार अंसारी ने कहा कि शुक्रवार सुबह 10:30 बजे बिना प्रशासनिक अधिकारियों के बांदा जेल में एसपी आए। उनके साथ 15-20 पुलिसकर्मी थे। उन्होंने वर्दी नहीं पहनी थी। उनकी बैरक की तलाशी ली। आरोप लगाया कि उन्हें भय है कि कहीं कोई आपराधिक वस्तु रखकर कोई नया केस में न फंसा दें। उनकी हत्या भी की जा सकती है। विधायक के अधिकारों का हनन किया। तलाशी के दौरान अपमानित भी किया। उनकी जान को खतरा है। उन्हें बी श्रेणी की सुविधा दिलाने और सुरक्षा की गुहार लगाई। एडीजीसी शशि शर्मा ने आरोप पर कहा कि बांदा जेल में एसपी ने अवमानना की है तो विधानसभा अध्यक्ष से शिकायत करनी चाहिए।

तत्कालीन डीएम और एसएसपी की भी हो सकती है गवाही
एडीजीसी के मुताबिक, मामले में दस गवाह हैं। तत्कालीन एसओ वादी शिवशंकर शुक्ला और तत्कालीन उप निरीक्षक रूपेंद्र गौड़ को गवाही के लिए समन भेजे जाएंगे। तत्कालीन जिलाधिकारी आरके तिवारी प्रदेश के मुख्य सचिव हैं। जेल में छापा मारा गया था, तब वो आगरा के जिलाधिकारी थे। उन्हें भी गवाही के लिए आना होगा। वहीं तत्कालीन एसएसपी सुबेश कुमार सिंह की भी गवाही होगी। इनको भी समन भेजे जा सकते हैं।

मोबाइल और बुलट प्रूफ जैकेट हुई थी बरामद
बाहूबली विधायक मुख्तार अंसारी वर्ष 1999 में केंद्रीय कारागार आगरा में निरुद्ध थे। 18 मार्च 1999 को तत्कालीन जिलाधिकारी आरके तिवारी और एसएसपी सुबेश कुमार सिंह ने निरीक्षण किया था। मुख्तार अंसारी की बैरक की तलाशी ली थी। उनकी बैरक से मोबाइल और बुलट प्रूफ जैकेट मिली थी। उनके पास बरामद मोबाइल सिम को रामपाल के नाम से फर्जी प्रपत्र तैयार करके लिया गया था। 

मुख्तार अंसारी को जान का खतरा: जेल में जताई हत्या की आशंका, अदालत से लगाई सुरक्षा की गुहार
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें