बांदा एसपी पर अपमानित करने का आरोप
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी के दौरान मुख्तार अंसारी ने कहा कि शुक्रवार सुबह 10:30 बजे बिना प्रशासनिक अधिकारियों के बांदा जेल में एसपी आए। उनके साथ 15-20 पुलिसकर्मी थे। उन्होंने वर्दी नहीं पहनी थी। उनकी बैरक की तलाशी ली। आरोप लगाया कि उन्हें भय है कि कहीं कोई आपराधिक वस्तु रखकर कोई नया केस में न फंसा दें। उनकी हत्या भी की जा सकती है। विधायक के अधिकारों का हनन किया। तलाशी के दौरान अपमानित भी किया। उनकी जान को खतरा है। उन्हें बी श्रेणी की सुविधा दिलाने और सुरक्षा की गुहार लगाई। एडीजीसी शशि शर्मा ने आरोप पर कहा कि बांदा जेल में एसपी ने अवमानना की है तो विधानसभा अध्यक्ष से शिकायत करनी चाहिए।
तत्कालीन डीएम और एसएसपी की भी हो सकती है गवाही
एडीजीसी के मुताबिक, मामले में दस गवाह हैं। तत्कालीन एसओ वादी शिवशंकर शुक्ला और तत्कालीन उप निरीक्षक रूपेंद्र गौड़ को गवाही के लिए समन भेजे जाएंगे। तत्कालीन जिलाधिकारी आरके तिवारी प्रदेश के मुख्य सचिव हैं। जेल में छापा मारा गया था, तब वो आगरा के जिलाधिकारी थे। उन्हें भी गवाही के लिए आना होगा। वहीं तत्कालीन एसएसपी सुबेश कुमार सिंह की भी गवाही होगी। इनको भी समन भेजे जा सकते हैं।
मोबाइल और बुलट प्रूफ जैकेट हुई थी बरामद
बाहूबली विधायक मुख्तार अंसारी वर्ष 1999 में केंद्रीय कारागार आगरा में निरुद्ध थे। 18 मार्च 1999 को तत्कालीन जिलाधिकारी आरके तिवारी और एसएसपी सुबेश कुमार सिंह ने निरीक्षण किया था। मुख्तार अंसारी की बैरक की तलाशी ली थी। उनकी बैरक से मोबाइल और बुलट प्रूफ जैकेट मिली थी। उनके पास बरामद मोबाइल सिम को रामपाल के नाम से फर्जी प्रपत्र तैयार करके लिया गया था।
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