पुलिस ने ही विभाग को कर दिया कमजोर
कारतूस प्रकरण काफी गंभीर है और हेड मोहर्रिर ने कारतूस गुम करके विभाग को ही कमजोर करने का प्रयास किया है। इतनी बड़ी संख्या में कारतूस कम होने से पुलिस कमजोर हुई है।
विभाग पर उठ रहे हैं सवाल
कारतूस गुम होने की जानकारी वर्ष 2017 में हुई तो तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की गई। यह सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है। इससे पहले कई एसएसपी एटा में रहे, लेकिन मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया या फिर तत्कालीन हेड मोहर्रिर को बचाने का प्रयास किया गया। ऐसे तमाम सवाल भी खड़े हुए हैं।
मामला संज्ञान में आने के बाद मुकदमा दर्ज कराया गया है। कारतूस गुम होने का प्रकरण वर्ष 2011 का है। इसको गंभीरता से लेकर जांच कराई जा रही है, जो भी दोषी मिलेगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- उदय शंकर सिंह, एसएसपी
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