महताब बाग के पास ग्यारह सीढ़ी पार्क में ताजमहल के साये में सुरमयी शाम सजाने के सपने चूर-चूर हो गए। कोर्ट से केस जीतने के बाद किसान ने पार्क में 6 बीघा जमीन ट्रैक्टर से जुतवा कर बैरिकेडिंग कर दी। पार्क के गेट पर बोर्ड लगा दिया, जिस पर लिखा है कि यह जमीन प्रशासन की ओर से किसान के नाम है। अंदर आना मना है।
कछपुरा स्थित नगला देवजीत, नई आबादी निवासी किसान मुन्ना लाल ने बताया कि इस जमीन के लिए उन्होंने 40 साल कानूनी लड़ाई लड़ी। उनके पिता रूप सिंह और ताऊ नत्थी लाल (मौजा चक हफ्तम स्थित खसरा संख्या 608, 610, 613, 614 व 615 कुल रकबा 6 बीघा 8 विस्वा) काश्तकार थे। 1976 में अर्बन सीलिंग में उनकी जमीन गई, जिसके विरुद्ध उन्होंने सिविल वाद दायर किया। वर्ष 1998 में जिला जज ने काश्तकार के हक में फैसला सुनाया। जिसके बाद भूमि को राजकीय अभिलेखों में अपने नाम दर्ज कराने की कवायद शुरू की गई। किसान ने बताया कि खसरा-खतौनी में नाम दर्ज हो गए हैं। इसके बाद ही भूमि को खेती के लिए जोता है। भूमि पर पुराने दो बोरिंग भी हैं।
उधर, इस भूमि पर मंडलायुक्त रितु माहेश्वरी ने कई कार्य प्रस्तावित किए थे। ताज महोत्सव में यहां सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ था। इसके अलावा म्यूजियम, सौंदर्यीकरण व अन्य कार्य भी प्रस्तावित हैं। जिनके लिए एडीए में कवायद चल रही है। मार्च 1997 में मशहूर यूनानी संगीतकार यान्नी ने यहां शो आयोजित किया था। हैरानी की बात है कि ग्यारह सीढ़ी पार्क में ट्रैक्टर चला। 6 बीघा जमीन जोत दी गई लेकिन अफसर बेखबर हैं।
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चंद कदम पर ताज व्यू पॉइंट
पार्क से चंद कदम की दूरी पर महताब बाग है। जहां एडीए का ताज व्यू पॉइंट है। यहां से पर्यटक ताजमहल को पार्श्व से निहारते हैं। बीच में यमुना नदी बहती है। इसके अलावा यहां कुछपुरा गांव है। पास में हुमायूं मस्जिद है। ताज व्यू पॉइंट पर भारतीय पर्यटकों के लिए 15 रुपये और विदेशी पर्यटकाें के लिए 50 रुपये का टिकट लगता है।
नष्ट हो रही नजूमियों की प्रयोगशाला
पार्क के पास ही राष्ट्रीय महत्व की संरक्षित धरोहर ग्यारह सीढ़ी स्मारक है। जहां मुगलकाल में नजूमियों की प्रयोगशाला हुआ करती थी। संरक्षण और देखभाल में लापरवाही के कारण यह संरक्षित स्मारक नष्ट हो रहा है। स्मारक का गेट टूटा पड़ा है। सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। दिनभर असामाजिक तत्वों का डेरा रहता है। यहां बनी ग्यारह सीढ़ी व कुआं पर पत्थर टूट रहे हैं।
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टीम भेजकर जांच कराएंगी
मंडलायुक्त रितु माहेश्वरी का कहना है कि उन्हें जानकारी नहीं। जमीन एडीए की है। टीम भेजकर मौके पर जांच कराई जाएगी।