बांके बिहारी मंदिर के अंदर श्रद्धालुओं की भीड़
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मथुरा में आराध्य के दर्शन की आस लिए वृंदावन आने वाले आठ श्रद्धालुओं की बीते दो सालों में बांकेबिहारी के दर पर मौत हो चुकी है। किसी की मौत संकरे रास्ते में दम घुटने से हुई तो किसी की मंदिर परिसर के भीतर दम घुटने से। हर बार पुलिस-प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़ा होता है, लेकिन सुधार के नाम पर कुछ नहीं होता। व्यवस्था बनाने के लिए दर्जनों प्रयोग हो चुके है, लेकिन कोई भी सिरे नहीं चढ़ता, जिसका खामियाजा दूर दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को उठाना पड़ता है।
बीती चार अप्रैल को ही दिल्ली निवासी एक श्रद्धालु की मौत हो गई। शनिवार को तीन श्रद्धालु बेहोश हो गए। दरअसल मंदिर मार्ग से लेकर परिसर के भीतर तक श्रद्धालुओं की भीड़ को काबू करने में पुलिस-प्रशासन की कोई कारगर योजना नहीं है। इससे पहले 19 मार्च को महाराष्ट्र निवासी सुनील की मौत हो गई थी। बीते साल 24 दिसंबर को बीना गुप्ता (70) पत्नी ओम प्रकाश गुप्ता निवासी गंज बाजार, महोली, सीतापुर और मंजू मिश्रा (58) पत्नी भोलेनाथ मिश्रा निवासी अधारताल, जबलपुर, मध्य प्रदेश की मौत मंदिर मार्ग पर हुई थी।
इससे पूर्व वर्ष 2022 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पर्व पर श्रीकृष्ण के जन्म के बाद मंगला आरती के दौरान ठाकुर श्रीबांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं की भगदड़ मचने से नोएडा निवासी निर्मला देवी और वृंदावन के रुक्मिणी विहार निवासी रामप्रसाद विश्वकर्मा की मृत्यु हो गई थी। जबकि एक दर्जन से अधिक की तबीयत बिगड़ गई थी। इससे पूर्व श्रीबांके बिहारी मंदिर में 12 फरवरी 2022 को गोवर्धन रोड स्थित आनंद लोक काॅलोनी निवासी लक्ष्मण सिंह की दम घुटने से मृत्यु हो गई। इसके एक माह बाद ही 12 मार्च 2022 को मुंबई की सतनाम सोसाइटी निवासी मधु अग्रवाल की भी भीड़ में दम घुटने से मृत्यु हुई थी।
महज 1000 हजार भक्तों के एक बार में दर्शन की क्षमता
वर्ष 1864 में स्थापित श्रीबांके बिहारी मंदिर में हर रोज हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करते हैं। शनिवार और रविवार को यह संख्या एक लाख के पार होती है। विशेष त्योहारों पर तो पांच लाख से अधिक श्रद्धालु एक दिन में यहां आ जाते हैं। बीती जन्माष्टमी के मौके पर पुलिस का आकलन 50 लाख का था। जबकि मंदिर परिसर के भीतर चौक का एरिया 48 बाई 48 फुट का है, जिसमें एक समय में महज एक हजार के करीब लोग ही आ पाते हैं। ऐसे में पुलिस-प्रशासन के सामने भीड़ नियंत्रण बड़ी चुनौती साबित होती है। बांकेबिहारी कॉरिडोर बनने के बाद 10 हजार लोग एक साथ दर्शन कर सकते हैं।