भीड़ ने जमकर किया था उपद्रव
सपा के सांसद के आवास पर बुधवार को 50-60 कार्यकर्ताओं की भीड़ पहुंची थीं। इसके लिए पहले से ही सोशल मीडिया पर ऐलान किया गया था। क्षत्रिय करणी सेना के ओकेंद्र राणा ने कुबेरपुर इंटरचेंज पर पहुंचने की अपील की थी। बवाल के बाद पुलिसकर्मियों ने चार कार्यकर्ताओं को मौके से ही पकड़ लिया था।
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ये उठ रहा सवाल
सवाल है कि पुलिस की ओर से लिखाए गए केस में पुलिस ने क्षत्रिय करणी सेना के प्रदर्शन का उल्लेख तक नहीं किया है। जबकि थाने लाए गए कार्यकर्ताओं से नाम, पते लिखे गए होंगे। उनसे यह भी पूछा गया होगा कि वह किस मकसद से सांसद के आवास पर आए थे। पूरी एफआईआर में एमजी रोड पर हुई घटना का जिक्र भी दरोगा ने नहीं किया है, जिसमें पुलिसकर्मियों ने कार्यकर्ताओं की गाड़ी को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन वह पुलिसकर्मियों को धकियाकर आगे बढ़ गए थे।
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सपा नेता ने भी नहीं दर्ज कराया नाम
इसी तरह सपा नेता की ओर से दर्ज कराए मुकदमे में एक भी कार्यकर्ता का नाम नहीं लिखा गया है। न ही क्षत्रिय करणी सेना का उल्लेख है। उन्होंने भी अज्ञात लोगों की भीड़ पर जानलेवा हमला करने का आरोप लगाय है। यहां तक कि उन्होंने सोशल मीडिया पर दो दिन से ऐलान देने का जिक्र किया है, लेकिन कौन ऐलान दे रहा था, यह नहीं लिखा गया है। इस तरह से दोनों एफआईआर में हमलावरों की पहचान तक नहीं खोली गई है। अब पुलिस कह रही है कि वीडियोग्राफी करवाई गई है।
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