ज्योतिषाचार्य रामचंद्र शर्मा वैदिक
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इस वर्ष आषाढ़ी गुप्त नवरात्र आठ दिनों के होंगे। 11 जुलाई रविवार से प्रारंभ होकर 18 जुलाई नवमी को गुप्त नवरात्र का समापन होगा। ज्योतिषाचार्य रामचंद्र शर्मा वैदिक ने बताया कि इस वर्ष सप्तमी तिथि का क्षय होने से नवरात्र नौ दिनों के बजाय आठ दिनों के होंगे। 16 जुलाई शुक्रवार को मां कात्यायनी व कालरात्रि का पूजन एक साथ होगा।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार वर्ष में कुल चार नवरात्र होते हैं। ये चैत्र नवरात्र, आषाढ़, आश्विन व माघ माह में होते हैं। इनमें दो नवरात्र चैत्र और आश्विन माह के उजागर होते हैं। आषाढ़ और माघ माह के नवरात्र गुप्त होते हैं। चारों नवरात्र की अपनी-अपनी महत्ता है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष कोविड के चलते चारों नवरात्रियां सामूहिक रूप से नहीं मनाई जा सकी। इस वर्ष भी चैत्र नवरात्र नहीं मनाया गया।
गुप्त नवरात्र में कैसे करें देवी पूजा
नवरात्र में घट स्थापना, चंडी पाठ, नवार्ण मंत्र साधना, अखंड दीप साधना, उपवास, दुर्गा सप्तशती के मंत्रों से अष्टमी व नवमी को हवन पूजन, कन्या पूजन, नवदुर्गा व दशमहाविद्या साधना, यंत्र, मंत्र व तंत्र सिद्धि का विशेष महत्व है। गुप्त नवरात्रि में दशमहाविद्या साधना की विशेष महत्ता है। साधना सात्विक विधि से शुद्धता व पवित्रता से ही की जाना चाहिए।
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि आषाढ़ी गुप्त नवरात्र में भडली नवमी की विशेष मान्यता है। यह अबूझ संज्ञक मुहूर्त की श्रेणी में आता है। भडली नवमी को गुप्त नवरात्रि का समापन होता है। 20 जुलाई को देवशयनी एकादशी से चार माह के लिए देवशयन काल व चतुर्मास का आरंभ होने से मंगन कार्यों पर विराम लग जाता है। इसलिए भडली नवमी को अबूझ मुहूर्त में सभी प्रकार के शुभ कार्य किये जा सकते हैं।
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