फर्जी लाइसेंस और अवैध शस्त्र के मामले में मुख्य आरोपी भूपेंद्र सारस्वत पर जमीनों के बड़े खेल करने का भी आरोप है। विवादित मकान हो या फिर जमीन, किसी पर भी अपने गिरोह के सदस्यों की मदद से हाथ रखता था। भूपेंद्र से जिसने भी दोस्ती की, बाद में उसने उसे दगा दिया। या तो केस दर्ज कराकर जेल भिजवा दिया, या फिर गिरफ्तारी का भय दिखाकर वसूली कर ली।
एसटीएफ को नगला अजीता निवासी भूपेंद्र सारस्वत के बारे में हर दिन नई-नई जानकारियां हाथ लग रही हैं। शिकायतकर्ता विशाल भारद्वाज ने भी अपने बयान में भूपेंद्र का काला चिट्ठा खोला है। विशाल का आरोप है कि भूपेंद्र पहले टिंचर का धंधा करता था। इससे उसकी पैठ आबकारी और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में हो गई। वह जमीनों के भी धंधे से जुड़ गया।
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इसके बाद वह विवादित जमीनों में हाथ रखने लगा। वह पहले दोस्ती करता है। इसके बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों में अपना रुतबा दिखाकर प्रभाव जमाता है। जमीनों के धंधे में रुपये लगाने का झांसा देकर लोगों से रकम लगवा देता था। जब कोई जमीन के कागज और रकम वापस मांगता है तो जेल भिजवाने का भय दिखा देता है। एसटीएफ रिकाॅर्ड खंगाल रही है। पीड़ितों को बुलाकर पूछताछ की जाएगी। शिकायत देने पर मुकदमे भी लिखे जा सकते हैं।
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बिके मकान को कब्जाने का आरोप
विशाल ने एसटीएफ को आवास विकास काॅलोनी के मकान के बारे में भी जानकारी दी है। उसने बताया कि इसी गिरोह ने करकुंज मार्ग पर एक मकान को बिकवाया था। ससुरालियों से अलग एक महिला अपने बच्चे के साथ मकान में रह रही थी। उसे फर्जी दस्तावेज के मामले में जेल भेजा गया था। इसके बाद मकान का साैदा किया था। तीन करोड़ की कीमत के मकान को मात्र 60 लाख रुपये में खरीद लिया गया था।
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लाॅटरी संचालक को जाना पड़ा था जेल
आवास विकास काॅलोनी में एक लाॅटरी संचालक को जेल भिजवाया गया था। पीड़ित विशाल ने एसटीएफ को बताया है कि इसमें भी गिरोह का हाथ था। भूपेंद्र ने उससे दोस्ती की थी। फिर रकम उधार ले ली थी। उधर, लोगों ने जब लाटरी संचालक से रकम मांगी तो वो दे नहीं सका। गिरोह रकम मांगने पर दिए नहीं, बाद में लाटरी संचालक को जेल जाना पड़ा था।