हिंदीहैंहमः संवाद में शामिल हुए शिक्षक
- फोटो : अमर उजाला
हमारी मातृभाष हिंदी है और हमें विश्वभर में हिंदी के माध्यम से पहचाना जाता है। इसके बाद भी हमारी शिक्षा व्यवस्था में हिंदी के लिए कोई खास नियम नहीं हैं। हम देखते हैं कि उच्च शिक्षा में हिंदी से हम बिल्कुल अलग-थलग हो जाते हैं, जो छात्र हिंदी विषय लेते हैं, उन्हें छोड़कर बाकी विषय लेने वाले छात्रों को हिंदी नहीं पढ़ाई जाती है।
इस पर सरकार को ध्यान देते हुए संशोधन करना चाहिए। नियम बनाना चाहिए कि उच्च शिक्षा में भी हिंदी विषय अनिवार्य किया जाना चाहिए, जिससे आगे भी हिंदी के ज्ञान को बढ़ाने के साथ-साथ इसे बढ़ावा दिया जा सके। ये बातें अमर उजाला के ऑनलाइन हिंदी संवाद कार्यक्रम में शिक्षकों ने कहीं। उन्होंने सरकार से इस बदलाव के प्रति विचार करने की मांग की।
हम देखते हैं कि इंटरमीडिएट तक तो हिंदी कम से कम एक विषय के रूप में जरूर रहती है। लेकिन स्नातक और परास्नातक में केवल कला वर्ग के छात्र ही हिंदी पढ़ते हैं। इसमें संशोधन की आवश्यकता है।
निर्दोष कुमार, शिक्षक।