सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने खुद चुनाव लड़ने के लिए करहल सीट को चुनकर पश्चिमी और मध्य यूपी की सीटों पर पकड़ बनाए रखने की रणनीति अपनाई है। उनके लिए यह सीट सियासी समीकरण के लिहाज से काफी सुरक्षित भी है। यहां के गांवों से सैफई परिवार का गहरा नाता रहा है।
मैनपुरी जिले की करहल विधानसभा सीट पर अभी सपा के सोबरन सिंह यादव विधायक हैं। उन्होंने 2017 के चुनाव में भाजपा के रमा शाक्य को करीब 38 हजार मतों से हराया था। यहां के करीब साढ़े तीन लाख से अधिक मतदाताओं में 40 फीसदी से ज्यादा यादव हैं। करीब आठ से 10 गांवों में मुस्लिमों की बहुलता है। शाक्य, लोधी, ब्राह्मण, ठाकुर और अनुसूचित जाति के मतदाता हैं।
करहल सीट पर 1957 से अब तक यहां सिर्फ एक बार 2002 में भाजपा जीती है। 1980 में यह सीट एक बार कांग्रेस के खाते में भी गई है। 1957 के पहले चुनाव में यहां प्रजा सोशलिस्ट पार्टी जीती थी। उस समय यहां दो सीटें हुआ करती थीं। वर्ष 1985 में दलित मजदूर किसान पार्टी के बाबूराम यादव जीते। इसके बाद 1989 और 1991 में समाजवादी जनता पार्टी और 1993 एवं 1996 में सपा के टिकट पर बाबूराम यादव विधायक चुने गए।
यहां वर्ष 2000 में हुए हुए उपचुनाव में सपा के अनिल यादव विधायक रहे। लेकिन 2002 में यहां से भाजपा के टिकट पर सोबरन सिंह यादव जीते थे। फिर वे सपा में आ गए और 2007, 2012 और 2017 में विधायक बने। वर्ष 2017 के चुनाव में इस सीट पर सपा उम्मीदवार को 1,04,221 वोट मिले, जबकि भाजपा के रमा शाक्य 65,816 वोट ही हासिल कर पाए थे।