भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते से आगरा के जूता, हस्तशिल्प और मार्बल इनले उद्योग को न्यूजीलैंड के बाजार में नए अवसर मिलने की उम्मीद है। स्थानीय उद्यमियों को शुल्क-मुक्त पहुंच से अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में फायदा मिलने की संभावना है।
भारत-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) लागू होने से ताजनगरी के निर्यातकों को बड़ा तोहफा मिला है। इस समझौते के बाद अब आगरा के प्रसिद्ध जूता, हस्तशिल्प और मार्बल इनले उत्पादों के लिए न्यूजीलैंड का बाजार शुल्क-मुक्त हो गया है। इस ऐतिहासिक समझौते का ब्लूप्रिंट 26 अप्रैल 2026 को आगरा में तैयार हुआ था। जब द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों के वाणिज्य मंत्रियों के बीच एफटीए पर सहमति बनी थी।
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न्यूजीलैंड-भारत की इस बैठक में आगरा को विश्व की शू कैपिटल के रूप में प्रोत्साहित करने का निर्णय हुआ था। देश के कुल जूता निर्यात में 25 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रखने वाले आगरा से सालाना करीब 5,000 करोड़ रुपये का जूता और 3,000 करोड़ रुपये का हैंडीक्राफ्ट निर्यात होता है। एफटीए लागू होने से स्थानीय इंजीनियरिंग कंपोनेंट्स और बूट्स को नया बाजार मिलेगा, वहीं न्यूजीलैंड से उच्च गुणवत्ता वाला फर और चमड़ा (कच्चा माल) आसानी से उपलब्ध होगा। जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और प्रस्तावित फुटवियर पार्क से प्रदेश का लेदर एक्सपोर्ट 3 से 5 गुना तक बढ़ने की उम्मीद है।
लॉजिस्टिक्स को मिलेगी रफ्तार
प्रस्तावित फुटवियर पार्क और जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से आगरा के निर्यातकों को सीधी वैश्विक कनेक्टिविटी मिलेगी। कच्चे माल के त्वरित आयात और तैयार उत्पाद के त्वरित निर्यात से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी, जिससे स्थानीय उद्योग को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त मिलेगी।
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ये बोले जूता उद्यमी
कन्फडरेशन ऑफ फुटवियर इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष ओपेंद्र सिंह लवली ने कहा कि न्यूजीलैंड से बेहतर फर और चमड़ा मिलने से हमारे उत्पाद अंतरराष्ट्रीय मानकों पर और मजबूत होंगे। यह निर्यातकों के लिए बड़ा अवसर है।
आगरा फुटवियर मैन्यूफैक्चर्स एंड एक्सपोर्ट चैंबर के अध्यक्ष गोपाल गुप्ता ने बताया कि सीमा शुल्क की बाधाएं खत्म होने से हमारे फुटवियर उत्पाद न्यूजीलैंड के बाजार में प्रतिस्पर्धी दरों पर उपलब्ध हो सकेंगे। कच्चे माल के रास्ते खुलेंगे।