'अफसरों ने मिटा दिए साक्ष्य'
भर्थना इटावा की श्वेता यादव ने कहा कि मेरे पति रिंकू की मृत्यु 27 अप्रैल को हुई थी। सबसे पहले अफसर ही अस्पताल की जांच के लिए गए थे। मुझे लगता है कि अफसरों ने ही साक्ष्य मिटा दिए। वीडियो में संचालक ने 96 मरीज भर्ती होने की बात स्वीकार की है। कितने मरीजों की मौत हुई ये उनकी बीएचटी से पता चल जाएगा।
'मिलीभगत से नहीं इनकार'
दहतोरा की प्रियंका सिंह ने कहा कि श्री पारस अस्पताल संचालक व अफसरों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता। दोनों सच्चाई को छुपाने चाहते हैं। पुलिस व प्रशासन संचालक को मदद कर रहा है। बीएचटी सार्वजनिक नहीं की गई। मैंने दो बार बीएचटी उपलब्ध कराने के लिए एडीएम सिटी से कहा, उन्होंने मना कर दिया।
'आखिर कब मिलेगा हमें न्याय'
राजा मंडी के सौरभ अग्रवाल ने कहा कि मेरी पत्नी की मौत श्रीपारस अस्पताल में 26 अप्रैल को हुई थी। मैंने थाने से लेकर डीएम साहब तक शिकायत की। संचालक से पूछताछ की गई न कोई जांच हुई। जांच रिपोर्ट भी फर्जी लगती है। आखिर हमें न्याय कब मिलेगा। अब सिर्फ अदालत से उम्मीद बची है। प्रशासन ने हमारे जख्मों पर नमक छिड़का है।
विशेषज्ञ बोले- सात साल तक बीएचटी सुरक्षित रखना जरूरी
चिकित्सा एवं विधि विशेषज्ञ के डॉ. देवेंद्र गुप्ता ने बताया कि मरीज की बीएचटी अस्पताल को सात साल तक सुरक्षित रखना जरूरी होता है। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं। मुझे लगता है मरीजों की बीएचटी खाली होंगी। उन्हें भरा ही नहीं गया होगा। इसलिए अस्पताल व प्रशासन पीड़ितों को रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करा रहा है।
'दाल में कुछ तो काला है'
पूर्व डीजीसी फौजदारी अशोक गुप्ता ने कहा कि श्री पारस अस्पताल में क्या हुआ ये सबको पता है। प्रशासन के छिपाने से कुछ नहीं होगा। इससे ये जरूर साबित हो रहा है कि दाल में कुछ तो काला है। वरना इतनी जल्दी क्लीन चिट नहीं मिलती। संवेदनशील मामले में लापरवाही बरती गई।
'जानबूझकर छिपा रहे हैं रिकॉर्ड'
अधिवक्ता फौजदारी राजवीर सिंह ने कहा कि प्रशासन मरीजों के रिकॉर्ड को जानबूझकर छिपा रहा है। रिकॉर्ड से हकीकत खुल जाएगी। यही वजह है कि डॉ. अरिन्जय ने भी किसी को रिकॉर्ड नहीं दिया। इस मामले में सीबीआई जांच होनी चाहिए। तभी हकीकत सबके सामने आएगी।