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आगरा: सोशल मीडिया पर शहर मुफ्ती के खिलाफ मुकदमे का विरोध, आगरा बंद का आह्वान

Thu, 19 Aug 2021 08:13 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा

सार

मोहर्रम तक अलग-अलग इलाकों में फोर्स की तैनाती की गई है। थाना पुलिस से लेकर अधिकारी रूट मार्च करेंगे। अगर, कोई शांति व्यवस्था में खलल डालता है या फिर बाजारों को जबरन बंद कराने का प्रयास करता है तो पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी। 
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तिरंगा फहराते राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शहर मुफ्ती के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद सोशल मीडिया पर टिप्पणियां शुरू हो गई हैं। शहर मुफ्ती के समर्थन में पोस्ट की जा रही हैं। एक पोस्ट में शहर मुफ्ती के समर्थन में बृहस्पतिवार को आगरा बंद का ऐलान किया गया है। इसमें कहा है कि सभी मुसलिम समाज के दुकानदार अपनी दुकानें बंद करके कलक्ट्रेट पहुंचेंगे। सुबह 10:30 बजे सभी लोग एसएसपी ऑफिस जाकर ज्ञापन सौंपेंगे। पोस्ट में निवेदक के रूप में समस्त मुसलिम समाज लिखा है। इसमें किसी का नाम नहीं है। पुलिस पोस्ट की जांच कर रही है।

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एसएसपी मुनिराज जी ने बताया कि जिले में धारा 144 लागू है। बृहस्पतिवार से मोहर्रम तक अलग-अलग इलाकों में फोर्स की तैनाती की गई है। थाना पुलिस से लेकर अधिकारी रूट मार्च करेंगे। अगर, कोई शांति व्यवस्था में खलल डालता है या फिर बाजारों को जबरन बंद कराने का प्रयास करता है तो पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी। 

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इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
राष्ट्र गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 3 : यह अधिनियम पूरे भारत में लागू है। जो कोई व्यक्ति भारतीय राष्ट्रीय गान को गाए जाने से रोकता है या ऐसा गायन कर रही किसी सभा में व्यवधान पैदा करता है उसे तीन वर्ष तक के कारावास या जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा।
धारा 153-बी : रष्ट्रीय एकता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले लांछन, प्राख्यान करना, दंड - तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनों। यह गैर जमानती है।
धारा 505 : मिथ्या कथन, जनश्रुति आदि को इस आशय से परिचालित करना कि विद्रोह हो अथवा लोकशांति भंग हो। दंड (तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना या दोनों) गैर जमानती अपराध हैं।
धारा 505 (1)(बी) : धार्मिक स्थान आदि में किया गया मिथ्या कथन, जनश्रुति आदि, इस आशय से कि शत्रुता घृणा या वैमनस्यता पैदा हो। दंड - पांच वर्ष के लिए कारावा और जुर्माना। गैर जमानती है।
धारा 508 : व्यक्ति को यह विश्वास करने के लिए उत्प्रेरित करके कि वह दैवी अप्रसाद का भाजन होगा, कराया गया कार्य। एक साल तक की सजा या जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। जमानती है।
(युवा अधिवक्ता संघ के वरिष्ठ अधिवक्ता योगेश लवानिया से मिली जानकारी के मुताबिक)

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