पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि सीवर, पानी की पाइप लाइन, गैस लाइन और यूटिलिटी डक्ट की खोदाई के कारण शहर में धूलकण लगातार बढ़ रहे हैं। मानसून में बारिश के कारण ये उड़े नहीं, लेकिन मौसम शुष्क होने के बाद सितंबर में अप्रत्याशित रूप से प्रदूषण की मात्रा में इजाफा हुआ है।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी भुवन प्रकाश ने बताया कि ताजनगरी में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ जाने की वजह धूल कण हैं। सड़कों की खोदाई इनका मुख्य कारण है। बारिश हो या पानी का छिड़काव हो तो धूल कण उड़ते नहीं है, तब प्रदूषण का स्तर घटता है।
जुर्माना लगाने पर भी सुधार नहीं
ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) अथॉरिटी के सदस्य उमेश शर्मा ने बताया कि धूल उड़ने से रोकने का इंतजाम न करने पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और अन्य कार्यदायी संस्थाओं पर पांच करोड़ से ज्यादा का जुर्माना लगाया जा चुका है, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है।
जल निगम के प्रोजेक्टर मैनेजर बीके गर्ग ने बताया कि हमने 252 किलोमीटर लंबी सड़कों और गलियों में सीवर लाइन बिछाने का काम किया है। अब मानसून खत्म हो चुका है। बारिश रुकने के बाद मौसम ठीक है। अब अगले सप्ताह से सड़कें बनाने का काम शुरू किया जाएगा। इंटरलॉकिंग टाइल्स वाली गलियों को ठीक करना शुरू कर दिया है
सांस रोगियों की दिक्कत बढ़ी
एसएन मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ सांस रोग विशेषज्ञ डॉ. जीवी सिंह ने बताया कि धूल कणों से सांस रोगियों को बहुत परेशानी हो रही है। इन दिनों संक्रमण तेज है। ऐसे में धूल कणों के कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है।
उनमें आशंका हो जाती है कि कहीं कोरोना का संक्रमण तो नहीं हो गया। ऐसे मरीज हमारे पास आ रहे हैं। धूल कण सांस की नली में जाकर व्यवधान पैदा करते हैं। हम सलाह दे रहे हैं कि लोग सुबह शाम गर्म पानी की भाप लें और जो पहले से ले रहे हैं, वे दवाइयां न छोड़ें।